पूरे देश में शिक्षा का पाठ्यक्रम एक समान ही होना चाहिए

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रतलाम। आगामी दिनों में नई शिक्षा नीति लागू होना है। नई शिक्षा नीति में शिक्षा का स्तर कैसा हो, इस पर शुक्रवार को कार्यशाला हुई। इसमें जनप्रतिनिधियों के साथ शिक्षा के जानकारों ने राय रखी। इसमें सभी का फोकस पूरे देश में एक समान पाठ्यक्रम लागू करने का रहा। 150 से ज्यादा सुझाव आए हैं। इन सुझाव को पोर्टल पर लोड किया जाएगा। ताकि इस आधार पर नई शिक्षा नीति बन सकें। जिला शिक्षा एवं

प्रशिक्षण संस्थान पिपलौदा की ओर से होटल बालाजी सेंट्रल में हुई इस कार्यशाला में रतलाम, नीमच एवं मंदसौर के प्राथमिक, माध्यमिक, हाईस्कूल, हायर सेकंडरी स्कूल, महाविद्यालय के शिक्षकों एवं प्राध्यापक शामिल हुए।

इन्होंने दिए सुझाव
विधायक चेतन्य काश्यप, जिला पंचायत अध्यक्ष परमेश मईडा, महापौर डॉ. सुनीता यार्दे, जिला पंचायत उपाध्यक्ष डी. पी. धाकड़, डीईओ अनिल वर्मा, आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त प्रशांत आर्य, डाइट प्राचार्य डॉ. राजेंद्र सक्सेना, डाइट प्राचार्य नीमच डॉ. अनुराग जायसवाल, डाइट प्राचार्य मंदसौर डॉ. उर्मिला तोमर आदि।

इसलिए रखी कार्यशाला

मानव संसाधान मंत्रालय ने नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट तैयार किया है। 21 मार्च को देश के विभिन्न प्रदेशों के शिक्षा मंत्रियों की बैठक बुलाई थी। इसमें सभी ने नई शिक्षा नीति लागू करने के पूर्व जमीनी स्तर पर सुझाव बुलाने की बात कही थी। इस आधार पर देश भर से सुझाव मंगाए हैं।

अच्छे परिणाम के आधार पर प्रमोशन मिले।
अच्छे माहौल में बच्चों को शिक्षा दी जाए।
बच्चों को स्किल एजुकेशन मिलना चाहिए। ऐसे पाठ्यक्रम संचालित हो जिससे हायर सेकंडरी के बाद ही स्टूडेंट रोजगार से जुड़ सकें।
तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा मिलना चाहिए।
शिक्षकों को प्रशिक्षण मिलना चाहिए ताकि वे बच्चों को ठीक ढंग से पढ़ा सकें।
हमें ऐसे प्रयास करना चाहिए जिससे सरकारी और प्राइवेट स्कूल का भेदभाव दूर हो।
पूरे देश में एक समान पाठयक्रम लागू होना चाहिए। भले ही वो क्षेत्रीय भाषा में हो।
लार्ड मैकाले द्वारा लाई गई शिक्षा नीति का आज तक बोझ ढोया जा रहा है, इसे बदलना चाहिए।