10 साल में रतलाम में बहुत कुछ बदल गया है। सबसे ज्यादा बदलाव यहां इंफ्रास्ट्रक्चर में हुआ। यहां का तेजी से विकास हो रहा है। मेरा नगर, मेरा तीर्थ के साथ हेल्दी, ग्रीन और क्लीन विलेज की भावना होना चाहिए। इस सूत्र का पालन करें तो देश की दशा और दिशा बदल सकती है।
यह बात जूनापीठाधीश्वर आचार्य व महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने मंगलवार को पत्रकारों से चर्चा में कही। उन्होंने कहा रतलाम एक मस्त शहर है। यहां के लोग शांत और मृदुल स्वभाव के हैं। जैसा सम्मान हम तीर्थ को देते हैं वैसा ही सम्मान हमें शहर को देना चाहिए। जैसे मंदिर की सीढिय़ों की सफाई होती है वैसे ही सफाई हमें हमारे घर, गांव और शहर की करना चाहिए। सैलाना रोड स्थित दयाल वाटिका में उन्होंने असहिष्णुता, ग्लोबल वार्मिंग, सोशल मीडिया जैसे कई मुद्दों पर पत्रकारों से चर्चा की। इसके बाद श्रद्धालुओं से भेंट की। स्वामीजी दोपहर में मंदसौर के लिए रवाना हो गए।
वकीलों ने किया सम्मान
जिला अभिभाषक संघ ने शॉल, श्रीफल और पुष्पगुच्छ से स्वामीजी का सम्मान किया। संघ अध्यक्ष संजय पंवार, सचिव दीपक जोशी, अशोक शर्मा, उमाकांत उपाध्याय, राजेश बाथम, अशोक चौहान, योगेश शर्मा, श्रवण यादव, धमेंद्रसिंह चौहान, सुरेंद्र भदौरिया, कमलेश पालीवाल, अरुण त्रिपाठी सहित कई वकील मौजूद थे।
असहिष्णुता- जिस देश में चींटियों को आटा डाला जाता है। नागपंचमी पर नाग को दूध पिलाया जाता है। अतिथि को भगवान माना जाता है। उस देश के मूल्यों को समझना आवश्यक है। चर्चा के लिए कुछ शब्द अच्छे हो सकते हैं लेकिन मेरे देश में असहिष्णुता जैसा कुछ नहीं है।
ग्लोबल वार्मिंग- ग्लोबल वार्मिंग के परिणामों का पता नहीं है। इससे प्राकृतिक विषमताएं सामने आ रही हैं। अतिवृष्टि एवं अनावृष्टि इसके परिणाम हैं। समय रहते इसके प्रति सचेत नहीं हुए तो आने वाला समय नुकसानदायी होगा।
सोशल मीडिया- सोशल मीडिया तेजी से बढ़ा है। यह जरूरी भी है। हर व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। आवश्यकता इस बात की है कि यह स्वतंत्रता तर्क-कुतर्क में नहीं उलझे।
शिक्षा, चिकित्सा और कृषि- पूरे देश में शिक्षा, चिकित्सा, कृषि की प्राथमिकता तय होना चाहिए। किसी एक सेक्टर को उन्नत बनाना है। शिक्षा, चिकित्सा के साथ कृषि में 5-10 सालों में देश को कैसे उन्नत बनाया जाए। इस दिशा में गंभीरता से सोचा जाना चाहिए।