सैलाना के शिकारवाड़ी तालाब में गणपति प्रतिमा विसर्जन के दौरान गुरुवार शाम चार युवकों की डूबने से मौत हो गई। शांति समिति की बैठक में विक्टोरिया तालाब में विसर्जन का निर्णय लिया था। यहां इंतजाम भी किए गए थे लेकिन नगर परिषद अध्यक्ष जगदीश पाटीदार ने खुद इस निर्णय के विपरीत सब्जी मार्टके में स्थापित गणेश प्रतिमा का विसर्जन शिकारवाड़ी तालाब में किया। देखादेखी दूसरे लोग भी वहीं विसर्जन करने लगे और हादसा हो गया।
शांति समिति की बैठक में निर्णय हुआ कि विक्टोरिया तालाब पर पानी के छींटे डालकर प्रतिमाओं का सांकेतिक विसर्जन होगा। इसके बाद ट्रक से प्रतिमाएं ले जाकर बांसवाड़ा डेम पर माही नदी में विसर्जित की जाएंगी। उधर शिकारवाड़ी तालाब पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। इस कारण चार युवकों को कोई बचा नहीं पाया। प्रशासन ने मृतक के परिजन को चार-चार लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है।
नगर परिषद अध्यक्ष जगदीश पाटीदार ने बताया सब्जी मार्केट का आयोजन व्यक्तिगत नहीं सार्वजनिक समिति का था। उन्होंने शिकारवाड़ी में विसर्जन किया। उनके अलावा भी कई लोगों ने शिकारवाड़ी में प्रतिमाएं विसर्जित की। शांति समिति का निर्णय सभी को मानना चाहिए। मै तो लोगों को मना करने गया था परंतु किसी ने बात नहीं मानी।
घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने थाने का घेराव कर दिया। सफाई कर्मचारियों के बेटों की मौत पर आक्रोशित लोगों ने सीएमओ जीवनराय माथुर के साथ मारपीट की। पैर में फ्करै्चर होने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया। यहां से परिजन उन्हें वडोदरा ले गए।
विक्टोरिया तालाब में प्रतिमा विसर्जन के दौरान तीन साल पहले बद्रीलाल पिता मांगीलाल की मौत हो गई थी। इसके बाद नगर परिषद विक्टोरिया तालाब पर पाल बनाई और सुरक्षा के लिए चौकीदार नियुक्त किया।
पाटीदार ग्रुप के गणपत पाटीदार ने प्रतिमा विसर्जन के लिए शिकारवाड़ी गए थे। उनके सामने चारों डूबे। हादसे की कहानी उनकी जुबानी- विसर्जन से पहले आरती कर रहे थे तभी अांबेडकर वार्ड के लोग भी आ गए। वे छोटी प्रतिमाएं लेकर तालाब में विसर्जन के लिए झुंड में जाने लगे।
कुनाल मकवाना (21), अंकित मकवाना (20), विशाल तंवर (20) व उसका भाई कमलेश (22) चारों एक-दूसरे को पकड़कर तालाब में उतरे। आगे बढ़े तो डूबने लगे। कमलेश तैरना जानता था। उसने बचाने की कोशिश की परंतु तीनों ने उसे पकड़ लिया। तभी आस-पास खड़े लोगों ने शोर मचाया।
आशीष पाठक ने मैजिक की रस्सी खोलकर फेंकी परंतु कोई रस्सी नहीं पकड़ पाया और डूब गए। इसके बाद मेरे साथ बद्रीलाल पाटीदार, कांतिलाल पाटीदार, चंद्रप्रकाश बैरागी व शंकरलाल ने गड्ढे में छलांग लगाई। पहले विशाल, फिर कुनाल व अंकित को निकाला। उनकी सांसें चल रही थीं। पेट दबाकर पानी निकाला।
जीप से अस्पताल भिजवाया परंतु रास्ते में ही दम तोड़ दिया। 5 मिनट बाद कमलेश को पूर्व जनपद सदस्य कैलाश खराड़ी ने निकाला लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी।