दिल के मरीजों के लिए राहत की खबर है। एंजियोप्लास्टी के लिए जरूरी मेडिकल डिवाइस स्टेंट की कीमतें डोमेस्टिक मार्केट में जल्द ही कम की जाएंगी। सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए स्टेंट को प्राइस कैप मकैनिज्म के तहत कवर करने का फैसला किया है। इस बारे में डिपार्टमेंट ऑफ फॉर्मास्युटिकल्स से एक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। डोमेस्टिक इंडस्ट्री का कहना है कि स्टेंट की कीमतें कम होने से हमें फायदा होगा और मार्केट शेयर बढ़ जाएगा।
 बता दें कि इसी साल जुलाई में सरकार ने स्टेंट की दो कटेगिरी को जरूरी दवाइयों लिस्ट में शामिल करने को कहा था। लेकिन, उसके बाद से इस पर कोई फैसला नहीं लिया जा सका। अब इस बारे में नोटिफिकेशन जारी किया गया है। इसे नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी के पास भेजा गया है, जहां इसे लेकर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। एनपीपीए को ही नई कीमतें तय करनी हैं।
डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरर को होगा फायदा
एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री के फोरम को-ऑर्डिनेटर राजीव नाथ ने बताया कि सरकार का यह फैसला डोमेस्टिक इंडस्ट्री के हित में है। उन्होंने कहा कि स्टेंट को अगर प्राइस कंट्रोल के दायरे में लाया जाता है, तो इससे डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरर को फायदा होगा। अभी स्टेंट बनाने वाली डोमेस्टिक कंपनियों का मार्केट शेयर इंडिया में 40 फीसदी है। लेकिन यह फैसला लागू होने के बाद 1 से 2 साल में यह बढ़कर 60 से 70 फीसदी क हो जाएगी। अभी 60 फीसदी स्टेंट विदेशी कंपनियों से इंपोर्ट किया जाता है।
 स्टेंट की कीमतों से परेशान हैं मरीज
-भारत में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर स्टेंट मल्टीनेशनल कंपनियों के होते हैं, जिनका रेट हाई है।
-प्राइवेट अस्पतालों में स्टेंट की कीमतें 1 लाख से 1.5 लाख रुपए के बीच है।
-सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 60 फीसदी स्टेंट प्रोसिजर प्राइवेट अस्पतालों में होते हैं।
-सरकारी अस्पतालों में सरकार ने मिनिमम 22 हजार रुपए स्टेंट की कीमत तय की है, लेकिन ये स्टेंट फर्स्ट या सेकंड जेनरेशन के हैं।
-जबकि, मार्केट में अब तीसरे और चौथे जेनरेशन के भी स्टेंट आ चुके हैं।
-ऐसे में मरीज अच्छी क्वालिटी के स्टेंट की डिमांड करते हैं, जिनकी कीमत बहुत ज्यादा होती है।
कीमतें तय होने से नहीं हो पाएगी मनमानी
-हेल्थ निनिस्ट्री के एक सीनियर ऑफिशियल के अनुसार समस्या यह भी है कि कुछ प्राइवेट अस्पताल एमआरपी के हिसाब से स्टेंट की कीमत लेते हैं। जबकि, अस्पतालों को डि‍स्ट्रीब्यूटर्स से एमआरपी से बहुत कम कीमत में यह मिल जाता है।
-इसी समस्या को देखते हुए लंबे समय से स्टेंट को जरूरी दवाइयों की लिस्ट में शामिल करने की बात चल रही थी।
-एक बार स्टेंट की कीमत तय हो जाने से मरीजों को फिक्स रेट पर स्टेंट मिलेगा।
साल दर साल बढ़ रही है स्टेंट की जरूरत
-भारत में हार्ट की बीमारी के साथ साल दर साल स्टेंट की मांग भी बढ़ रही है।
-नेशनल इंटरवेंशनल काउंसिल के अनुसार 2014 में 353346 स्टेंट प्रोसिजर हुए थे, जिसमें करीब 4.73 लाख स्टेंट का इस्तेमाल हुआ।

By parshv