शरीर में आत्मा का वास हर धर्म स्वीकार करता है। कठोपन‌िषद् और गरूड़ पुराण में बताया गया है, देह का त्याग करने के बाद यदि उसे मुक्ति न मिले तो वह लोक और परलोक के मध्य भटकती रहती है। किसी न किसी रूप में अपने होने का एहसास भी द‌िलाती है। धर्म ग्रंथ कहते हैं की आत्माएं जीव‌ित लोगों से एक दूरी बनाकर रखती हैं लेकिन उनकी कुछ हरकतें उन्हें अपने आकर्षण में बांधती हैं।

बड़े-बुजुर्गों का कहना है, सूर्यास्त के बाद महिलाओं को बाल नहीं खोलने चाहिए। विशेष तौर पर अमावस और पूर्ण‌िमा के दिन अथवा उनके आस-पास। मान्यता है क‌ि ऐसा करने से नकारात्मक शक्त‌ियां अपनी गिरफ्त में ले लेती हैं।

परफ्य़ूम, इत्र और तेज गंध वाली वस्तुएं रात के समय इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए। इनकी ओर आत्माओं का विशेष रूझान होता है। अकसर जादू-टोना और आत्माओं को निमंत्रण देने के लिए लोबान और तेज गंध वाली वस्तुओं को प्रयोग किया जाता है।

मृत शरीर को दफनाने अथवा जलाने के बाद श्मशान में पीछे मुड़कर नहीं देखा जाता। ताकि उन्हें पता रहे संसारिक लोग अब उन्हें भूल चुके हैं। उन्हें भी इस लोक से अपना नाता तोड़ प‌ितरों के लोक में जाना होगा। मृत व्यक्त‌ियों की स्मृतियों को भुल जाने में ही भलाई है अन्यथा उनका मोह संसार से नहीं जाता।

आत्मा नया शरीर पाने के लिए गर्भवती मह‌िलाओं पर नजर गड़ाए रखती है। आधी रात को उन्हें घर से नहीं न‌िकलना चाह‌िए।

रोग ग्रस्त शरीर की ओर आत्माएं आकर्ष‌ित होती हैं। बीमार होने पर भी जिस व्यक्ति का आत्मबल मजबूत है उस पर किसी भी तरह की नकारात्मकता हावी नहीं होती।

शारीरिक साफ-सफाई न रखने वाला नकारात्मक शक्त‌ियों को निमंत्रण देता है।

जिन स्थानों पर ताजी हवा, धूप और दीप नहीं द‌िखाया जाता, वे आत्माओं के प्रभाव में जल्दी आ जाते हैं।

By parshv