माणकचौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर में बुधवार को पहले दिन 400 से ज्यादा श्रद्धालु मंदिर में नोट, चांदी की सिल्लियां, सोने के जेवरात आदि लेकर पहुंचे। इनकी निगरानी के लिए मंदिर में 8 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

महालक्ष्मी मंदिर में पांच दिवसीय दीपोत्सव पर्व धनतेरस, रूपचौदस, दीपावली, पड़वा और भाईदूज तक मनाया जाएगा। इस दौरान मंदिर में प्रवेश द्वार से लेकर गर्भगृह तक नोटों की लड़ियों, हीरे, सोने-चांदी के आभूषण आदि से शृंगार किया जाता है। इन्हें भक्त ही चढ़ावे के रूप में मां महालक्ष्मी के दरबार में चढ़ाते हैं। बुधवार दोपहर 2 बजे से मंदिर में नोट, जेवरात आदि लेने की शुरुआत हुई। इस साल ये दोपहर 2 से शाम 5 बजे और रात 9 से 11 बजे तक ही लिए जा रहे हैं। मान्यता है कि मंदिर में धन-दौलत रखने से सालभर बरकत बनी रहती है। पहले दिन मंदिर में दोपहर 2 से 5 बजे तक 343 लोग सामग्री लेकर पहुंचे। इसमें नोटों की गड्डियां, चांदी की सिल्लियां, सोने के आभूषण थे। श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला रात 11 बजे तक चला। भक्तों को इसके बदले टोकन दिए गए। यह टोकन दिखाकर ही भक्तों को उनके द्वारा दी गई सामग्री लौटाई जाएगी। पंडित संजय पुजारी ने बताया जल्द ही मंदिर में नोटों की सजावट का काम शुरू हो जाएगा। धनतेरस पर माता के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को कुबेर पोटली दी जाएगी। कुबेर पोटली को घर की तिजोरी में रखने से वर्षभर बरकत बनी रहती है।

कैमरों और सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था- मां महालक्ष्मी मंदिर शहर ही नहीं वरन देशभर में प्रसिद्ध है। पिछले साल मंदिर में 100 करोड़ से ज्यादा का धन आया था। इस साल भी लगभग इतना ही धन मंदिर में आने का अनुमान है। मंदिर में बुधवार को 8 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। सुरक्षा गार्ड भी तैनाती रहेंगे। पहले दिन एक सुरक्षा गार्ड को तैनात किया गया।