प्रसिद्ध बरबड़ हनुमान मंदिर की संपत्ति पर अब शासन और पुजारी का अधिकार नहीं रहेगा। कोर्ट ने मंदिर का आधिपत्य मंदिर ट्रस्ट को सौंप दिया है। इसके आधिपत्य को लेकर 9 साल से शासन, पुजारी और ट्रस्ट के बीच विवाद का केस न्यायालय में चल रहा था। कोर्ट ने मंदिर में राम दरबार के पीछे स्थित पुजारी के कमरे का आधिपत्य भी ट्रस्ट को दिया है। मंदिर के पुजारी के एडवोकेट ने इस मामले में हाईकोर्ट में अपील करने की बात कही है।
बरबड़ हनुमान मंदिर में रविवार को ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने प्रेसवार्ता की। इसमें सचिव मधुकांत पुरोहित ने बताया कोर्ट के फैसले के अनुसार अब श्री हनुमानजी का बड़ा मंदिर देवस्थान बरबड़ मंदिर परिसर व इसकी देव संपत्ति 4.980 हे., 0.0600 हे. व 1.030 हे. स्थित संपत्ति और भूमि श्री हनुमानजी का बड़ा मंदिर देवस्थान न्यास की संपत्ति है। कोर्ट ने मंदिर में राम दरबार के पीछे स्थित पुजारी के कमरा भी ट्रस्ट को सौंपा है। फैसले में केस के दौरान ट्रस्ट को मंदिर में आए दान का जो नुकसान हुआ उसकी भरपाई के लिए पुजारी को 3 हजार रुपए प्रतिमाह के हिसाब से चुकाने का आदेश दिया है। राजस्व रिकॉर्ड में मंदिर की संपत्ति के दस्तावेजों में व्यवस्थापक के रूप में दर्ज कलेक्टर का नाम कम करने का आदेश भी कोर्ट ने दिया है। फैसले के अनुसार मंदिर की संपत्ति में ट्रस्ट के अलावा कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकेगा। पुजारी की नियुक्ति व संपत्ति की नीलामी का अधिकारी भी ट्रस्ट को होगा। इस दौरान अध्यक्ष कन्हैयालाल सारड़ा, कोषाध्यक्ष शांतिलाल चौधरी, ट्रस्ट सदस्य प्रहलाद पटेल आदि मौजूद थे।
हाईकोर्ट में अपील करेंगे
मामले को लेकर हाईकोर्ट में अपील की जाएगी। 2009 से 2017 तक शासन ने कोई भी दावा नहीं लगाया। शासन अपनी लापरवाही से यह मुकदमा हारा है। मंदिर से कमरा खाली नहीं किया जाएगा। स्टे लेकर आएंगे। – अमित पांचाल, पुजारी के एडवोकेट
7 मई 2008 को ट्रस्ट ने पुजारी कृष्णदास बैरागी के खिलाफ कोर्ट में वाद दायर किया था।
18 अगस्त 2009 को पुजारी के आवेदन पर मप्र शासन को कोर्ट ने पार्टी बनाया। शासन की तरफ से 6 अक्टूबर 2009 को वकील प्रस्तुत हुए व जवाब देने के लिए समय मांगा।
शासन व प्रशासन की तरफ से 5 साल बाद भी जवाब नहीं दिया गया। इससे न्यायालय ने 30 जुलाई 2013 को शासन का जवाब देने का अवसर समाप्त कर दिया।
2009 में पुजारी संघ ने तत्कालीन कलेक्टर को शिकायत कर तत्कालीन एसडीएम दिनेशचंद्र सिंघी से जांच कराई।
5 दिसंबर 2015 को केस लड़ने वाले पुजारी की ओर से प्रशासन से मंदिर संबंधी रिकॉर्ड मांगा गया लेकिन वह उसे उपलब्ध नहीं हुआ।
31 अक्टूबर 2017 को तृतीय अपर जिला न्यायाधीश एके सक्सेना ने मंदिर ट्रस्ट के पक्ष में फैसला सुना दिया।
ट्रस्टियों के अनुसार कोर्ट के फैसले से मंदिर जीर्णोद्धार व नवनिर्माण में आ रही बाधा दूर होगी। जीर्णोद्धार के तहत हनुमानजी की प्रतिमा यथावत रहेगी लेकिन राम दरबार थोड़ा पीछे किया जाएगा। अभी पीछे पुजारी का कमरा होने से राम दरबार को शिफ्ट करने में दिक्कत आ रही थी।
जमीन से 52 फीट ऊंचा होगा शिखर
जीर्णोद्धार दो चरण में होगा। पहले चरण में 4 करोड़ के काम होना हैं। इसके तहत हनुमान मंदिर के गर्भगृह के साथ मंदिर का शिखर बनेगा। मुख्य मंदिर का शिखर जमीन स्तर से 52 फीट ऊंचा होगा। वहीं सभा मंडप भी बनाया जाएगा। इसकी साइज 32 बाय 35 फीट की रहेगी और शिखर 32 फीट ऊंचा रहेगा। दाहिने तरफ अंबे माता और बाई तरफ गणेशजी का मंदिर बनाया जाएगा। महादेव का मंदिर भी नया बनेगा। दूसरे चरण में मुख्य द्वार से लेकर पिछले हिस्से के नाले तक संपूर्ण क्षेत्र का नए सिरे से विकास होगा। बगीचा और मनोरंजन के लिए झूले भी लगेंगे। प्रोजेक्ट पर करीब 10 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस पर करीब 10 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके लिए रविवार को मंदिर में अंतिम शिला का भूमिपूजन तीर्थ एवं मेला धर्मस्व विभाग अध्यक्ष विजय दुबे ने किया।