अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई.एम.एफ.) का मानना है कि एक वर्ष पहले भारत ने नोटबंदी की जो कवायद की थी उसके मध्यम अवधि में शानदार लाभ मिलेंगे।

आई.एम.एफ. के विलियम मरे ने कहा, ‘‘नोटबंदी की वजह से नकदी की कमी के कारण मुख्य रूप से शुरूआती तौर पर, निजी उपभोग, लघु उद्योग और आर्थिक गतिविधियों में कुछ अस्थायी बाधाएं पैदा हुईं। उन्होंने कहा, ‘‘(लेकिन) इनके प्रभाव अस्थायी होंगे।’’ आई.एम.एफ. जनवरी में भारत के साथ-साथ दुनिया के अन्य देशों की विकास दर पर अपने अनुमान जारी करने वाला है।