दक्षिणी दिल्ली की सात कॉलोनियों में पुर्निवकास के लिए 14 हजार से अधिक वृक्षों को काटने के फैसले के खिलाफ आज दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई हुई। नेशनल बिल्डिंग्स कन्स्ट्रक्शन कार्पोरेशन ’ (एनबीसीसी) ने उच्च न्यायालय में कहा कि वह 4 जुलाई तक केट नहीं काटेंगे।
एनबीसीसी ने कहा कि कोर्ट की अगली सुनवाई तक राजधानी में पेड़ काटने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। बता दें कि दिल्ली में अभी तक करीब 2500 पेड़ काटे जा चुके हैं जिसके विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए। याचिकाकर्ता ने पेड़ कटाई के खिलाफ याचिका दायर करते हुए कहा कि अगर इतनी मात्रा में राजधानी में पेड़ काटे जाएंगे तो प्रदूषण काफी हद तक बढ़ जाएगा जिससे आम लोगों को सांस तक लेने में परेशानी होगी और पेड़ काटना पर्यावरण के लिए भी सही नहीं है।
वहीं रविवार को सरोजिनी नगर इलाके में करीब 1,500 प्रदर्शनकारियों ने पेड़ों को गले लगाकर अपने ‘चिपको आंदोलन’ की शुरुआत की। बता दें कि 1970 के दशक में उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) में पेड़ों की कटाई के विरोध में लोगों ने यह आंदोलन चलाया था। लोगों ने पेड़ों को ‘राखी’ के तौर पर हरे रंग का रिबन भी बांधा। सोशल मीडिया पर पेड़ कटाई को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए वेल्फी बूथ भी बनाए गए हैं।