चीन के साथ भारत का सीमा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। चीन ने एक बार फिर भारत को धोखा देकर भारतीय सीमा में घुसपैठ की है और इस बार तो चीनियों ने भारतीय सीमा में 5 किलोमीटर लंबी सड़क ही बना डाली है। यह सड़क उन्होंने लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बनाई है। चीन ने एलएसी के पास 5 किलोमीटर तक सड़क बना ली है।
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चीन के साथ भारत का सीमा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। चीन ने एक बार फिर भारत को धोखा देकर भारतीय सीमा में घुसपैठ की है और इस बार तो चीनियों ने भारतीय सीमा में 5 किलोमीटर लंबी सड़क ही बना डाली है। यह सड़क उन्होंने लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बनाई है। चीन ने एलएसी के पास 5 किलोमीटर तक सड़क बना ली है।
कुछ दिनों पहले ही चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा में घुसपैठ कर अपने तंबू गाड़ दिए थे। सूत्रों के मुताबिक चीन के प्रधानमंत्री ली कच्छयांग के भारत दौरे से दो दिन पहले 17 मई को चीनी सेना ने भारतीय सेना के एक गश्ती दल को एलएसी तक जाने से रोक दिया था। चीनी सैनिक लगातार भारतीय सीमा में अपनी दखलअंदाजी कर रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि चीन कोई बड़ा झटका भारत को देने वाला है।
जानकारी तो यह भी मिल रही है कि भारतीय सीमा में चीनी सैनिकों ने घुसपैठ करते हुए 5 किलोमीटर तक सड़क बना ली है। बता दें कि कुछ दिनों पहले भी इसी इलाके में चीनी सैनिकों ने अपने तंबू लगा रखे थे। इस दौरान चीन ने लद्दाख के उत्तरी छोर पर न सिर्फ एलएसी पर 19 किलोमीटर भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की थी।
वैसे भारतीय रक्षा मंत्रालय ने इसकी पुष्टि नहीं की है। हालांकि अप्रैल में भी सरकार और प्रशासन ने काफी बाद में माना था कि चीनी भारतीय सीमा में घुस आए हैं और उन्हें बाहर करने के लिए बातचीत की जा रही है।
पिछले दिनों ही भारतीय विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद चीन के दौरे पर गए थे। यहां से लौटने के बाद खुर्शीद ने कहा था कि उनकी यात्रा सफल रही और चीन से सैन्य विवाद पर अब बात काफी सकारात्मक दौर में पहुंच गई है। लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है।
लगता तो ऐसा है कि चीन हमारे साथ दोस्ती नहीं दुश्मनी के मूड में है और हमें चारों ओर से घेर रहा है। भारत के सभी पड़ोसी देशों को अपने साथ मिला रहा है। एक तरह वह पाकिस्तान से मधुर संबंध बना रहा है, तो दूसरी ओर नेपाल और श्रीलंका से।
श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे चार दिवसीय आधिकारिक दौरे के लिए चीन रवाना हुए हैं। उम्मीद है कि इस दौरे में वह कई द्विपक्षीय करार पर हस्ताक्षर करेंगे। राष्ट्रपति राजपक्षे अपने चीनी समकक्ष शी चिनफिंग के आमंत्रण पर चीन का दौरा कर रहे हैं। चीन में नये नेतृत्व के सत्ता में आने के बाद से राजपक्षे का यह पहला दौरा है। उनके 27-30 मई के दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच आपसी संबंध मजूबत होने की उम्मीद है। बीजिंग बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए कोलंबो को अरबों डॉलर की सहायता दे रहा है।