27 साल पुराने बोफोर्स घोटाले का असल सच शायद अब दुनिया के सामने कभी नहीं आ सकेगा। बोफोर्स घोटाले के मुख्य आरोपी और इटली के कारोबारी ओतावियो क्वात्रोकी की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गयी है। गांधी परिवार के करीबी समझे जाने वाले क्वात्रोकी पर 64 करोड़ के बोफोर्स तोप सौदे में दलाली का आरोप था।
उधर इटली के मिलान में बोफोर्स कांड के मुख्य आरोपी क्वात्रोकी…
27 साल पुराने बोफोर्स घोटाले का असल सच शायद अब दुनिया के सामने कभी नहीं आ सकेगा। बोफोर्स घोटाले के मुख्य आरोपी और इटली के कारोबारी ओतावियो क्वात्रोकी की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गयी है। गांधी परिवार के करीबी समझे जाने वाले क्वात्रोकी पर 64 करोड़ के बोफोर्स तोप सौदे में दलाली का आरोप था।
उधर इटली के मिलान में बोफोर्स कांड के मुख्य आरोपी क्वात्रोकी ने आखिरी सांस ली और इधर इस बहुचर्चित घोटाले का सच जानने की आखिरी उम्मीद भी करीब करीब धराशाई हो गई। 1986 के बोफोर्स रक्षा सौदे में दलाली के आरोपी इटली के कारोबारी ओतावियो क्वात्रोकी का बोफोर्स घोटाले में सबसे पहले नाम 1999 में दाखिल सीबीआई के आरोप पत्र में आया था।
क्वात्रोकी को भारतीय सेना के लिये खरीदी गयी स्वीडिश होवित्जर तोप के सौदे में 64 करोड़ रुपयों की रिश्वत के मामले में आरोपी बनाया गया था। अस्सी के दशक में इस घोटाले ने कांग्रेस और राजीव गांधी सरकार की खासी किरकिरी करवाई थी नतीजतन 1989 के आम चुनाव में कांग्रेस को करारी शिकस्त खानी पड़ी थी।
क्वात्रोकी को गांधी परिवार का करीबी माना जाता था और विपक्षी दल तभी से क्वात्रोकी को लेकर कांग्रेस और गांधी परिवार पर हमला बोलते रहे हैं। मामला तूल पकड़ने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिये क्वात्रोकी ने 1993 में भारत छोड़ देना ही मुनासिब समझा।
2002 में क्वात्रोकी के भारत प्रत्यर्पण की सीबीआई की पहली कोशिश मलेशिया में नाकाम रही। उसके बाद क्वात्रोकी 2007 में इंटरपोल के वारंट के आधार पर अर्जेंटीना में हिरासत में लिया गया था लेकिन सीबीआई की आधी अधूरी तैयारियों के चलते क्वात्रोकी का भारत प्रत्यर्पण नहीं हो सका। दोनों बार क्वात्रोकी बच निकला और सीबीआई हाथ मल कर रह गई।
हैरानी की बात तो ये कि 19 साल तक अदालत में मामला चलाने के बाद 2009 में सीबीआई ने क्वात्रोची पर चल रहा मामला बंद करने की सिफारिश की जिसके बाद दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने साल 4 मार्च 2011 को क्वात्रोकी को रिश्वतखोरी के मामले से बरी कर दिया।
कांग्रेस पर भी क्वात्रोकी को बचाने के आरोप लगते रहे हैं। जानकर मानते हैं कि क्ववात्रोकी की मौत के बाद भी सियासी फायदे के लिये बोफोर्स का मुद्दा जिंदा रहेगा।
हालांकि सियासी घालमेल और सीबीआई की सुस्ती के चलते 27 साल पुराने बोफोर्स कांड के बेपर्दा होने की उम्मीद काफी कम ही रह गई थी लेकिन क्वात्रोकी की मौत के साथ करोड़ों की दलाली का ये राज़ शायद हमेशा के लिये दफन हो गया है।
क्वात्रोकी को लेकर पिछले साल एक इंटरव्यू आया था। द हूट डॉट ओआरजी की वेबसाइट पर आए स्वीडेन के पूर्व पुलिस प्रमुख स्टेन लिंडस्ट्रॉम के इंटरव्यू में देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई पर शर्मसार करनेवाले इल्जाम लगाए थे।
स्टेन का पहला इल्जाम ये है कि क्वात्रोकी की कंपनी ए ई सर्विसेज को रिश्वत दिए जाने के पूरे सबूत उसने सीबीआई को दिए। इन सबूतों में क्वात्रोकी और उसकी बीवी का बैंक अकाउंट नंबर भी था। लंदन के BSI AG bank बैंक में क्वात्रोकी के खाता नंबर 5A5151516M में पंद्ह करोड़ और उसकी बीवी मारिया के अकाउंट नंबर 5A5151516L में पांच करोड़ रुपये जमा थे। ये रकम बोफोर्स सौदे की दलाली में दी गई रकम ही थी। लेकिन सीबीआई ने इन सबूतोंको कोई तरजीह नहीं दी।
सीबीआई पर स्टेन का दूसरा इल्जाम यह है कि उसने बोफोर्स मामले में अमिताभ बच्चन को फंसाने की साजिश की और जब स्वीडेन की पुलिस इस साजिश में शामिल नहीं हुई तो सीबीआई ने स्वीडेन के सबसे बड़े अखबार को बोफोर्स सौदे में अमिताभ की कथित भूमिका को लेकर झूठी खबर दे दी। लंदन की अदालत में अखबार ने कबूल किया कि अमिताभ के बारे में झूठी खबर उन्हें भारत की खुफिया एजेंसी ने ही दी थी।
सीबीआई पर स्टेन का तीसरा और सबसे सनसनीखेज इल्जाम ये है कि सीबीआई के अधिकारी अदालत में तो पूरी सरगर्मी से तफ्तीश करने का दावा करते रहे लेकिन हकीकत ये थी कि सीबीआई के किसी जांच अधिकारी ने स्टेन से कभी मुलाकात तक करने की जहमत नहीं उठाई जबकि स्वीडेन में इस मामले की तफ्तीश स्टेन के ही जिम्मे थी। हद तो तब हो गई जब पिछले साल 4 मार्च को सीबीआई ने अदालत से इस मामले को खत्म करने की गुजारिश कर दी।