क्या छपरा में स्कूली बच्चों को मिड-डे मील के नाम पर ज़हर परोसा गया। बिहार के शिक्षामंत्री पीके शाही ने इसी बात का शक ज़ाहिर किया है। पटना में बीमार बच्चों की तीमारदारी के लिए पहुंचे शाही का कहना था कि शुरुआती जांच इसी बात की ओर इशारा करती है। उनके मुताबिक पटना मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की भी यही राय है। शाही के मुताबिक कुल मरने वाले बच्चों की तादाद…

क्या छपरा में स्कूली बच्चों को मिड-डे मील के नाम पर ज़हर परोसा गया। बिहार के शिक्षामंत्री पीके शाही ने इसी बात का शक ज़ाहिर किया है। पटना में बीमार बच्चों की तीमारदारी के लिए पहुंचे शाही का कहना था कि शुरुआती जांच इसी बात की ओर इशारा करती है। उनके मुताबिक पटना मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की भी यही राय है। शाही के मुताबिक कुल मरने वाले बच्चों की तादाद बढ़कर 20 हो गई है।
छपरा में मौत के निवाले से बीमार हुए छात्रों को बेहतर इलाज के लिए आधी रात पटना लाया गया। इससे पहले इन 34 बच्चों को घंटो तबीयत खराब रहने के बावजूद ना तो छपरा अस्पताल लाया गया और ना ही पटना। हालांकि पटना मेडिकल कॉलेज में बच्चों के इलाज के लिए प्रशासन मुस्तैद दिखा। शिक्षामंत्री पीके शाही खुद मौके पर मौजूद रहे। डॉक्टरों ने भी माना कि अगर इन बच्चों को पहले यहां लाया जाता तो उनका इलाज बेहतर हो सकता था।
मिड डे मील योजना की शुरुआत तो हुई थी गरीब बच्चों को मुफ्त खाना खिलाने के लिए लेकिन जो कुछ छपरा के स्कूल में हुआ उसके बाद इस योजना के बंदोबस्त पर सवाल उठने लगे हैं। कठघरे में बिहार की नीतीश सरकार भी है।
बिहार के छपरा जिले में मिड डे मील ने ऐसा कहर ढाया कि कई मासूम मौत के हवाले हो गए और कई अभी भी मौत से जूझ रहे हैं। बीमार बच्चों की तादाद 80 के करीब है। 23 बच्चों को पटना के पीएमसीएच में लाया गया है जिनमें 5 की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है।
सभी बच्चे छपरा के मसरख प्राइमरी स्कूल में पढ़ते थे। मंगलवार को मिड डे मील की खिचड़ी इनके लिए मौत का निवाला बन गई। इस दर्दनाक वाकये ने नीतीश सरकार के बंदोबस्त पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कई मासूम काल की गाल में समा गए, कई अभी भी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं लेकिन मातम के इस मौके पर भी सियासत जारी है। विपक्ष नीतीश के इस्तीफे की मांग पर अड़ा है तो सत्ता पक्ष बीजेपी और आरजेडी पर गठजोड़ के आरोप मढ़ने में लगा है।
मिड डे मील योजना के तहत देश के 12 करोड़ बच्चों को प्राइमरी स्कूलों में दोपहर का भोजन मिलता है जिनमें बिहार के लाखों बच्चे भी शामिल हैं लेकिन इस एक घटना ने पूरे बंदोबस्त को कठघरे में ला दिया है। बहरहाल इन मासूमों का मुजरिम कौन है इसकी पड़ताल शुरू हो चुकी है। देखते हैं लापरवाही का ठीकरा किसके सिर फोड़ा जाता है और कार्रवाई की गाज किस पर गिरती है।