कोलगेट मामले में सीबीआई को उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया है कि वो सरकार से कोई भी सूचना साझा न करे। सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से यह अपील की थी कि वह सरकार से इस केस से जुड़ी सूचनाएं साझा करना चाहती है।
उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई से साफ-साफ शब्दों में कह दिया है कि कोलगेट की जांच से जुड़ी कोई भी जानकारी सरकार से साझा न करे और कोई रुकावट हो तो वह अदा…

कोलगेट मामले में सीबीआई को उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया है कि वो सरकार से कोई भी सूचना साझा न करे। सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से यह अपील की थी कि वह सरकार से इस केस से जुड़ी सूचनाएं साझा करना चाहती है।
उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई से साफ-साफ शब्दों में कह दिया है कि कोलगेट की जांच से जुड़ी कोई भी जानकारी सरकार से साझा न करे और कोई रुकावट हो तो वह अदालत को इसकी जानकारी दी। सरकार के साथ सूचना साझा करने का मतलब एक हाथ से लेना और दूसरे हाथ से देना है। ऐसा माना जा रहा है कि इससे सीबीआई के हौसले बुलंद होंगे और वे इस केस की जांच बिना डरे कर पाएगी।
बता दें कि इस मामले की सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा कि 2006 से 2009 तक के कोयला आवंटन की जांच डीआईजी रविकांत करते रहेंगे। पहले उन्हें इस जांच से हटा दिया गया था। अदालत ने दागी एसपी विवेक दत्त को जांच से अलग रखने की इजाजत भी दे दी है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि वह उन्हें जांच से जुड़ी कुछ जानकारी सरकार से साझा करने दे। सीबीआई की इस अपील पर सबको हैरानी हुई थी। साथ ही इस अपील से यह भी साफ हो गया था कि सीबीआई सरकार के सामने कितनी लाचार है।
हालांकि उच्चतम न्यायालय इससे पहले सीबीआई को कोलगेट मामले में पूरी निष्पक्षता और ईमानदारी से जांच करने की हिदायद दी थी। जब सीबीआई ने इस केस से जुड़ी एक रिपोर्ट कानून मंत्री से साझा की थी तो इस पर उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई को सरकार का ‘तोता’ कहा था।