उत्तराखंड में भारी बारिश और कुदरत के कहर के बाद केदारनाथ और इसके रास्ते में पड़ने वाले गांव रामबाड़ा की सफाई का काम शुरु कर दिया गया है। उत्तराखण्ड पुलिस ने रामबाड़ा की सफाई और शवों के दाह संस्कार के लिए ऑपरेशन शुरु कर दिया है। पुलिस कमांडो और एनआईएम के पर्वतारोहियों का दल रस्से और अन्य जरूरी साजो सामान के साथ रामबाड़ा में भारी जोखिम के बावजूद सफाई…

फिर से बसने लगा उत्तराखंड, सफाई अभियान जारी

उत्तराखंड में भारी बारिश और कुदरत के कहर के बाद केदारनाथ और इसके रास्ते में पड़ने वाले गांव रामबाड़ा की सफाई का काम शुरु कर दिया गया है। उत्तराखण्ड पुलिस ने रामबाड़ा की सफाई और शवों के दाह संस्कार के लिए ऑपरेशन शुरु कर दिया है। पुलिस कमांडो और एनआईएम के पर्वतारोहियों का दल रस्से और अन्य जरूरी साजो सामान के साथ रामबाड़ा में भारी जोखिम के बावजूद सफाई अभियान को अंजाम दे रहा है। दो रात तक इस इलाके में कैंप करके इस दल ने आसपास के पूरे इलाके को छान मारा और सभी स्थानों को तलाश करके अब तक वहां मिले 42 शवों का अन्तिम संस्कार किया।

जिस केदारनाथ को महीने भर पहले कुदरत ने बर्बाद कर दिया था उसी केदारनाथ में फिर से पूजा शुरु करने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है।

उत्तराखंड में राहत बांट रहे मुख्यमंत्री को उम्मीद है कि केदारनाथ सहित चारों धामों में यात्रा 30 सितंबर तक शुरु हो जाएगी। इसके लिए सरकार की ओर से इन सभी जगहों पर टीमें भेज दी गई हैं जो इन दिनों मंदिरों की साफ सफाई में लगी हुई है।

सीएम विजय बहुगुणा ने उम्मीद जतायी है कि जल्द से जल्द इन मंदिरों में पूजा पाठ शुरु हो जाएगी और आने वाले दिनों में इन्हें श्रद्धालुओं के लिए भी खोल दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह बातें रूद्रप्रयाग में कही वह यहां लोगों को राहत राशि का चेक बांटने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने राहत कार्यों का भी जायजा लिया और राहत में हो रही देरी के लिए सरकारी अधिकारियों को फटकार लगाई।

उत्तराखंड के गोविन्दघाट में फंसे सैकड़ों खच्चर मालिकों ने आपदा के 35 दिन बाद आखिरकार राहत की सांस ली। कुदरत का कहर झेल चुके इन लोगों को शनिवार को बाहर निकाला गया, पिछले कई दिनों से बीआरओ अलखनंदा पर पुल बनाने में जुटा हुआ था और आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई। नदी पार करने के बाद सभी खच्चर मालिकों ने राहत की सांस ली और जान बचाने के लिए बीआरओ का शुक्रिया अदा किया। बता दें कि पिछले कई दिनों से यहां 840 पोनी और खच्चर फंसे हुए थे। नदी पर बना पुल बाढ़ में बह गया था जिसकी वजह से इनकी सांसे अटकी हुई थी। उफनती अलखनंदा को देखकर लोग इसे पार करने से डर रहे थे।

उत्तराखंड में त्रासदी के बाद शिवनगरी हरिद्वार एक बार फिर बम बम भोले की गूंज के लिए तैयार हो गयी है। इसी महीने की 23 तारीख से कांवड़ यात्रा शुरु होने जा रही है और इस बार कांवड़ियों का पूरा हिसाब किताब रखा जाएगा। भक्तों को कांवड़ यात्रा शुरु करने से पहले अपना रजिस्ट्रेशन करवाना होगा जिसकी तैयारी कर ली गई है। हरिद्वार के नारसन बॉर्डर से ही इसकी शुरुआत हो जाएगी और 5 जगहों पर भक्तों के रजिस्ट्रेशन किए जाएंगे। यही नहीं प्रशासन ने हाल में आई आपदा को देखते हुए शिवभक्तों को हरिद्वार और ऋषिकेश से उपर नहीं जाने देने का फैसला लिया है। ऐसे में शिवभक्तों को इन्हीं जगहों से गंगा जल लेना पड़ेगा।

By parshv