क्या रुपये की गिरावट कहीं जाकर थमेगी? ऐसा लगता तो नहीं है, क्योंकि रुपया मंगलवार को डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। डॉलर के मुकाबले रुपया 61.80 रुपये पर पहुंच गया है और आशंका जताई जा रही है कि यह जल्द ही 62 रुपये का स्तर पार कर जाएगा। रुपये की गिरावट का असर महंगाई पर पड़ना तय माना जा रहा है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुप…

क्या रुपये की गिरावट कहीं जाकर थमेगी? ऐसा लगता तो नहीं है, क्योंकि रुपया मंगलवार को डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। डॉलर के मुकाबले रुपया 61.80 रुपये पर पहुंच गया है और आशंका जताई जा रही है कि यह जल्द ही 62 रुपये का स्तर पार कर जाएगा। रुपये की गिरावट का असर महंगाई पर पड़ना तय माना जा रहा है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 61.80 प्रति डॉलर के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। मुद्रा बाजार में मंगलवार के कारोबार के शुरुआती दौर में ही रुपये में यह गिरावट दर्ज की गई, हालांकि बाद में वह कुछ सुधरकर 61.57 के स्तर पर पहुंच गया। गौरतलब है कि 8 जुलाई को भी रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 61.21 का रिकॉर्ड निचला स्तर छुआ था।
वैसे सोमवार को भी रुपया गिरावट के साथ 60.88 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। उधर, यह गिरावट इसलिए भी उल्लेखनीय और आश्चर्यजनक है, क्योंकि डॉलर में भी कुछ अन्य बड़ी मुद्राओं की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट का असर शेयर बाज़ारों पर भी पड़ा है, और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स भी मंगलवार को लगभग डेढ़ महीने बाद एक बार फिर 19,000 के स्तर से नीचे पहुंच गया।
आरबीआई को उम्मीद है कि रुपये की मजबूती के लिए देश में विदेशी निवेश की आवक बढ़नी चाहिए, वहीं सरकार ने कदम के सामने विपक्षी दलों की मांग एक रोड़े के रूप में काम कर रही है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की इस गिरावट का सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा। इससे एक बार फिर कच्चा तेल भारतीय पेट्रोलियम कंपनियों को ऊंचे दाम में मिलेगा और वे पेट्रोल और डीजल के दामों में इजाफा करेंगे।