हिन्दी सिनेमा जगत में कई सालों से अपना जलवा बिखेर रहे और दो बार अकादमी पुरस्कार जीत चुके एकमात्र भारतीय संगीतकार ए आर रहमान के पास अपने काम से आराम लेने की फुर्सत नहीं है और उन्हें ऐसा लगता है मानों उन्होंने अपने करियर की शुरूआत की है।
अपने प्रंशसकों के बीच मोजार्ट ऑफ मद्रास के नाम से जाने जाने वाले रहमान ने वृत्तचित्रों और टीवी कार्यक्रमों की धुन त…

हिन्दी सिनेमा जगत में कई सालों से अपना जलवा बिखेर रहे और दो बार अकादमी पुरस्कार जीत चुके एकमात्र भारतीय संगीतकार ए आर रहमान के पास अपने काम से आराम लेने की फुर्सत नहीं है और उन्हें ऐसा लगता है मानों उन्होंने अपने करियर की शुरूआत की है।
अपने प्रंशसकों के बीच मोजार्ट ऑफ मद्रास के नाम से जाने जाने वाले रहमान ने वृत्तचित्रों और टीवी कार्यक्रमों की धुन तैयार कर अपने करियर की शुरूआत की। बाद में 1992 में उनके धुनों से सजी पहली फिल्म रोजा प्रदर्शित हुयी थी। तब से लेकर आज तक उन्होंने रंगीला, ताल, दिल से, जोधा अकबर, स्वदेश, रंग दे बसंती, रॉकस्टार, जब तक है जान और रांझना जैसी फिल्मों के लिये धुन तैयार किया है।
रहमान ने कहा मेरे पास आराम करने का समय नहीं है। अभी भी मेरे पास काफी कुछ करने के लिए है। अपने संगीत स्कूल और कई सारी अन्य परियोजनाओं में मैं व्यस्त हूं। यह ऐसा है जैसे ईश्वर का दिखाया हुआ रास्ता। मैं यहां पर संगीत तैयार करने के लिए हूं और लगातार ऐसा करता रहूंगा। यह सब मेरे लिए सिर्फ शुरूआत भर है।
इस साल कोक स्टूडियो के तीसरे सत्र में संगीतकार रहमान नयी भूमिका में दिखेंगे। इसके लिए वह दो तमिल गीतों को लयबद्ध करेंगे। इसके अलावा प्रसून जोशी द्वारा लिखे गये एक अन्य गीत जरिया और रवीन्द्रनाथ ठाकुर के माइंड विदआउट फियर पर आधारित एक टे्रक के लिए वह धुन तैयार करेंगे।