चुनावी नतीजों के आधार पर आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए रास्ता खुलने और उद्योग के अनुकूल सरकार बनने की उम्मीद ने घरेलू शेयर बाजार को ऊंचा उछाल दिया।
इसके अलावा अमेरिका में रोजगार के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहने और चीन में निर्यात बढ़ने के आंकड़ों से एशियाई बाजारों में रही सकारात्मक धारणा ने भी घरेलू बाजार को उछाल दिया।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स सोमवार को 329.89 अंक की बढ़त के साथ 21,326.42 अंक पर बंद हुआ, जोकि इसकी अबतक की सबसे ऊंची बंदी (क्लोजिंग हाई) रही।
कारोबार के दौरान यह 487.21 अंक की छलांग लगाकर 21,483.74 अंक का अब तक का सबसे ऊंचे स्तर (ऑल टाइम हाई) को भी छुआ।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 104 अंक के उछाल के साथ 6,363.90 अंक पर बंद हुआ। बीएसई में 96 शेयरों 52 सप्ताह के सबसे ऊंचे स्तर को छुआ।
राजस्थान, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद सोमवार को मिजोरम में कांग्रेस को जनादेश मिलने से स्पष्ट हो गया कि जनता साझा सरकारों की राजनीतिक अनिश्चितता के दौर से उबरने के मूड में है।
बाजार ने इस सकारात्मक संकेत का दिल खोल कर स्वागत किया। चौतरफा लिवाली के झोंके में बीएसई के 13 में से 12 वर्गों ने बढ़त दर्ज की। कैपिटल गुड्स 3.14 फीसदी, बैंकिंग 2.93, रीयल्टी 2.61, तेल-गैस 1.71, पावर 1.59 और ऑटो वर्ग में 1.37 फीसदी की तेजी रही।
शुक्रवार को 864 करोड़ रुपये की लिवाली करने के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को भी तगड़ी खरीदारी की।
सेंसेक्स की मुनाफा कमाने वाली प्रमुख कंपनियों में आईसीआईसीआई 5.16 फीसदी, सेसा स्टरलाइट 5.04, एलएंडटी 4.52, मारुति 3.85, ओएनजीसी 3.48, एनटीपीसी 2.85, विप्रो 2.80, हिंडाल्को 2.74, महिंद्रा 2.22 और एचडीएफसी बैंक 2.02 फीसदी की बढ़त में रहे।
स्थायी नहीं है चुनावी नतीजों से आई तेजी चुनावी रौनक से बाजार में आई बढ़त के इस माहौल में बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को आने वाले दिनों में गिरावट का संकेत देते हुए सचेत रहने की सलाह दे रहे हैं।
ब्रोकिंग फर्म नोमुरा ने अपने एक नोट में कहा है कि चुनावी नतीजों से बाजार में आई तेजी लंबे समय तक रहने वाली नहीं है। पांच राज्यों जैसे चुनावी नतीजे आम चुनाव में भी देखने को मिलेंगे, इसे लेकर आश्वस्त नहीं रहा जा सकता।
इसलिए तेजी का यह दौर अस्थायी है। अमेरिका में आर्थिक मजबूती लौटने पर फेडरल रिजर्व की ओर सें बांड खरीद बंद की जा सकती है। इससे बाजार में गिरावट देखने को मिल सकती है।
इसी तरह बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच ने चेताया है लंबे समय के लिहाज से बाजार की असली रिकवरी 2014 के आम चुनावों के बाद ही देखने को मिल सकती है। मौजूदा तेजी का प्रभाव अल्प कालिक है।