रतलाम। वनवासी कल्याण परिषद की प्रतियोगिता के दूसरे दिन सोमवार को खिलाड़ियों ने जुलूस निकाला। इसमें पहले मैदान में खिलाड़ियों ने दिन भर पसीना बहाया और शाम को दोगुने उत्साह के साथ मैदान में डांस किया।
सैकड़ों वनवासी आदिवासी नृत्य की ताल पर एक लय में झूमे। यहां से जुलूस ढोल-ढमाकों के साथ आगे बढ़ा और प्रमुख मार्गों से होते हुए खेल मैदान पहुंचा। जुलूस के स्वागत में कई जगह मंच लगाकर पुष्प वर्षा की गई। सड़कों पर खिलाड़ी हाथ में झंडे लिए पारंपरिक वेषभूषा में नृत्य करते चल रहे थे।
आगे घुड़सवार पीछे खिलाड़ी, समाजसेवी, परिषद पदाधिकारी, खेल से संबंधित कोच, पूर्व खिलाड़ी विभिन्न जिलों से आए दल प्रभारी शामिल थे। प्रतियोगिता में मध्यभारत के 21 जिलों के 1035 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। स्वागत- राजपूत नवयुवक मंडल एवं महिला मंडल ने चल समारोह का स्वागत किया।
अध्यक्ष महेंद्रसिंह राठौर सहित अन्य समाजजन मौजूद थे। वनवासी बंधुओं के स्वागत में शहर सराय चौराहे पर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने पुष्प वर्षा की। इसमें मंच के जिला संयोजक शाहिद कुरैशी, सह संयोजक इलियास अहमद सहित सदस्यों से स्वागत किया।
समापन व पुरस्कार वितरण आज– रतलाम वनवासी कल्याण परिषद जिला अध्यक्ष डॉ. उदय यार्दे व संयोजक अजीत छाबड़ा ने बताया तीन दिवसीय प्रांतीय प्रतियोगिता का समापन व पुरस्कार वितरण मंगलवार सुबह 11 बजे होगा। मुख्य अतिथि आदिम जाति कल्याण मंत्री ज्ञानसिंह आर्य होंगे। अध्यक्षता वनवासी कल्याण परिषद के क्षेत्रीय खेल प्रमुख मुकुंद द्रविड़ करेंगे। विधायक डॉ.राजेंद्र पांडेय, मथुरालाल डामोर, संगीता चारेल और जितेंद्र सिंह गेहलोत विशेष अतिथि रहेंगे।
एक पैर पर खड़े होकर चलाए तीर, दौड़कर लाया भी
भले ही जन्म से एक पैर नहीं है लेकिन हौसला दोगुना है। कुछ कर गुजरने का जज्बा ही कुक्षी धार के मुकेश परमार को वनवासी कल्याण परिषद की प्रतियोगिता में ले आया।
मुकेश कला एवं विज्ञान महाविद्यालय के खेल मैदान पर आयोजित प्रांतीय खेल महोत्सव में आर्चरी यानी तीरंदाजी की प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं। मुकेश तीर की ही तेजी से दौड़ते हुए एक पैर और डंडे के सहारे 50 मीटर दूरी पर गिरे तीर को उठाने जाते हैं और फिर लौटकर निशाना साध भी लेते हैं। मुकेश इससे पहले बिहार के पुरनिया जिले में आर्चरी मिनी वर्ग में राष्ट्रीय खिताब अपने नाम कर चुके हैं।