शताब्दी का पहला महायोग, मंगलवार अष्टमी व पुष्य नक्षत्र का बन रहा है संयोग

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धार्मिक व ज्योतिषशास्त्रों में दीपावली से पहले पड़ने वाले पुष्य नक्षत्र को नए वस्तुओं की खरीदारी हेतु विशेष लाभकारी माना जाता है। पुष्य नक्षत्र सभी नक्षत्रों में सर्वाधिक शुभ व बलवान होने के कारण नक्षत्र राज कहलाता है। विवाह को छोड़कर सभी मांगलिक शुभ कार्यों में पुष्य नक्षत्र का महत्व है। शास्त्रों में पुष्य को सौ दोष दूर करने वाला, शुभ कार्य उद्देश में निशिचत सफलता प्रदान करने वाला व बहुमूल्य वस्तुओं की खरीददारी हेतु सबसे श्रेष्ठ व शुभ फलदाई माना गया है। कार्तिक महीने में पुष्य नक्षत्र का आना अत्यधिक शुभ माना जाता है। शास्त्रनुसार इस दिन विशेष वस्तुओं की खरीदी का विशेष महत्व है। मान्यतानुसार पुष्य नक्षत्र में क्रय की गई विशेष वस्तुएं दीर्घावधि तक कारगर रहकर शुभता प्रदान करती हैं।

वर्ष 2015 में पुष्य नक्षत्र का संयोग दो दिन तक रहेगा। ज्योतिष के महूर्त खंड अनुसार पुष्य नक्षत्र सोमवार सप्तमी तिथि दिनांक 02.11.15 शाम 4 बजकर 26 मिनट से प्रारंभ होकर मंगलवार अष्टमी तिथि दिनांक 03.11.15 शाम 05 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। ग्रह स्थिति अनुसार दीपावली से पहले पड़ने वाला पुष्य नक्षत्र खरीददारी हेतु धनतेरस के समान फलदायक है।

ऐसा माना जाता है कि पुष्य नक्षत्र के दिन किए गए हर शुभ कार्य का परिणाम सौ गुणा हो जाता है, इसी तरह इस दिन किया गया दान अक्षत हो जाता है और इस दिन खरीदी गई वस्तुएं भी अक्षत रहेगी।

ज्योतिषशास्त्र के महूर्त खान अनुसार पुष्य नक्षत्र संचरण के समय चंद्र अपनी स्वराशि कर्क राशि में होने के कारण विशेष बलवान होता है। वर्तमान में राहू अपनी उच्चराशि कन्या व केतू अपनी उच्चराशि मीन में चल रहे हैं व सूर्य-बुध तुला में बैठकर बुधादित्य योग बना रहे हैं। ग्रह नक्षत्र संचालिका अनुसार मंगलवार के दिन अष्टमी तिथि व पुष्य नक्षत्र होने के कारण धन वृद्धि के योग बन रहे हैं। 12 सालों बाद सिंहस्थ गुरु के संयोग में मंगल-पुष्य संयोग के साथ साध्य और शुभ योग भी है। मंगल-पुष्य योग में व्यापार के लिए नए खाता बही, नए वाहन, जमीन जायदाद के सौदे, गहने, मशीनरी, इलेक्ट्रानिक्स समान खरीदना शुभ रहेगा। भूमि पर मंगल का आधिपत्य है, अत: मंगल पुष्य में खरीदी गई जमीन विशेष फलदाई होती है।

भारतीय ज्योतिष के महूर्त प्रणाली अनुसार यह संयोग इस शताब्दी का पहला संयोग है। सोमवार सप्तमी तिथि दिनांक 02.11.15 शाम 4 बजकर 26 मिनट से प्रारंभ होकर मंगलवार अष्टमी तिथि दिनांक 03.11.15 शाम 05 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। तिथियों के आधार पर देखें तो यह नक्षत्र दो तिथियों में रहेगा। कार्तिक कृष्ण पक्ष पर सोमवार व सप्तमी व अष्टमी तिथि पर मंगलवार को नक्षत्र का संयोग रहेगा। इसी के साथ सिंहस्थ गुरु के संयोग में मंगल-पुष्य संयोग के साथ साध्य और शुभ योग भी है। ऐसा संयोग इस शताब्दी का पहला महायोग है जो दीपावली से पहले बन रहा है। इस संयोग में शिव, लक्ष्मी कार्तिके व कुबेर के मंत्र-अनुष्ठान का सौ गुना अधिक फल मिलता है।