नई दि‍ल्‍ली। बढ़ते फंसे कर्ज से नि‍पटने के लि‍ए रि‍जर्व बैंक ऑफ इंडि‍या (आरबीआई) ने बैंकों और अन्‍य वि‍त्‍तीय संस्‍थानों से कहा है कि‍ वह कर्ज देने और खाता खोलने से पहले एक से ज्‍यादा एजेंसि‍यों से क्रेडि‍ट रेटिंग रि‍पोर्ट (सीआईआर) लें। आरबीआई ने जारी नोर्टि‍फि‍केशन में कहा, ‘बैंक और फाइनेंशि‍यल इंस्‍टि‍ट्यूट एक से ज्‍यादा क्रेडि‍ट इंफॉर्मेशन कंपनि‍यों (सीआईसी) से मि‍लने वाली क्रेडि‍ट रि‍पोर्ट के आधार पर क्रेडि‍ट प्रोसेस, लोन पॉलि‍सी और लोन प्रोवि‍जनिंग का नि‍र्णय करें।’ अब बैंकों को हर माह क्रेडि‍ट रेटिंग एजेंसि‍यों को लोन डि‍फाॅर्ल्‍ट्स का डाटा भेजने को कहा है।
 
जानबूझ कर कर्ज वापस न करने वालों का डाटा करें तैयार
  • आरबीआई ने अन्‍य नोर्टि‍फि‍केशन में कहा है कि‍ बैंक और वि‍त्‍तीय संस्‍था 30 जून 2014 को समाप्‍त ति‍माही तक 25 लाख रुपए तक के वि‍लफुल डि‍फॉर्ल्‍ट्स (जानबुझ कर कर्ज नहीं चुकाने वाले) का डाटा तैयार करें, ऐसा कि‍ वह पहले से करते आ रहे हैं।
इसी प्रकार, बैंक 30 सि‍तंबर तक के 1 करोड रुपए और उससे ज्‍यादा राशि‍ के डि‍फार्ल्‍ट्स की लि‍स्‍ट आरबीआई के पास भेजें।‍     
 
क्‍या है नया अादेश 
  • रि‍जर्व बैंक ने बैंक और वि‍त्‍तीय संस्‍थानों को सलाह दी है कि‍ वह अपने कॉर्पोरेट कर्जधारकों की रि‍पोर्ट क्रेडि‍ट इंफॉर्मेशन कंपनि‍यों को समय-समय पर देते रहें।
  • हर छह माह के भीतर इस रि‍पोर्ट को अपडेट करते रहें।
  • छह माह बाद बैंक और वि‍त्‍तीय संस्‍था उस डाटा और क्रेडि‍ट इंफॉर्मेशन कंपनि‍यों की रि‍पोर्ट का इस्‍तेमाल कमर्शि‍यल या कॉर्पोरेट कर्जधारकों के लि‍ए नीति‍यां बनाएं।
बैंकों को कि‍तना पैसा नहीं मि‍ला
भारतीय कर्मचारी बैंक संगठन ने 406 डि‍फॉर्ल्‍ट्स की लि‍स्‍ट जारी की थी, जि‍न्‍होंने बैंकों का 70,000 करोड़ रुपए का कर्ज वापस नहीं लौटाया है और वह कानूनी दांवपेच में फंसे हुए हैं। बैंकों का नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) 2 लाख करोड़ रुपए से ज्‍यादा हो गया है। कई लोन अकांउट बैड लोन से बचने के लि‍ए रीस्‍ट्रक्‍चरिंग कराने की मांग कर रहे हैं।

By parshv