बॉलीवुड एक्टर कार्तिक आर्यन का कहना है कि ‘प्यार का पंचनामा’ और ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ जैसी फिल्मों से युवा खुद को जुड़ा महसूस करते हैं। वो मानते हैं कि उनकी छवि ऐसी बन गई है कि वो एक ही तरह की फिल्में करते हैं, लेकिन उन्हें स्टीरियोटाइप होने से कोई फर्क नहीं पड़ता।

जब कार्तिक से पूछा गया कि क्या एक ही तरह की फिल्में करने से उन्हें टाइपकास्ट होने का डर सताता है। इस सवाल पर उन्होंने कहा, “मैं पहले से ही स्टीरियोटाइप हूं और मुझे इसकी कोई परवाह नहीं। दर्शकों ने हमें अपना प्यार दिया है और मैं इस सफर को इसी तरह जारी रखना चाहता हूं। युवा खुद को हमारी फिल्म से जोड़ पाते हैं और वो हमेशा हमारी फिल्मों का इंतजार करते हैं। यह आशीर्वाद है कि मेरे करियर में मुझे इतनी जल्दी यह मौका मिला।”