गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर सभी देशवासियों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस पर करारा ‘हमला’ बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री एक ही परिवार के भक्त बन गए हैं।
मोदी ने भुज के लालन कॉलेज में तिरंगा फहराया और सभी महापुरुषों को स्मरण किया। उन्होंने देशवासियों से सवाल किया कि क्या आजादी के दिवानों के सपने पूरे हुए हैं? क्या हम मानसिक गुलामी में जकडे़ नहीं हैं?
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उन्होंने कहा कि देश को आजादी के बाद यह बात महसूस हो रही है कि हम इस मनसिकता से कैसे बाहर निकलें? इससे बाहर निकलने की जरूरत है। देशवासी पिछले 60 साल से रटी रटाई बातें सुनकर ऊब चुके हैं।
‘पीएम एक ही परिवार के भक्त’
मोदी ने प्रधानमंत्री के भाषण की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि वह पीएम का भाषण सुन रहे थे ताकि उससे कुछ काम करने का जज्बा मिले, कुछ सीख मिले। उनके भाषण से कुछ संदेश की उम्मीद थी। लेकिन निराशा ही हाथ लगी।
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उन्होंने कहा कि बहुत दुख की बात है कि पीएम लाल किले से सिर्फ एक ही परिवार को याद करते हैं। जब आप नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का जिक्र कर रहे थे तो क्या लाल बहादूर शास्त्री का जिक्र कर नहीं सकते थे। उन्होंने जय जवान, जय किसान का नारा दिया। आपने उनको याद क्यों नहीं किया? सरदार पटेल, जिन्होंने कांग्रेस को पूरा जीवन समर्पित कर दिया, उनका भी आपने नाम नहीं लिया। इस बात पर दुख होता है। आपने एक ही परिवार का जिक्र क्यों किया?
‘गरीबों की थाली में छिड़क रहे हैं एसिड’
उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा पर कुछ बातें हैं जिस पर चर्चा करनी हैं लेकिन वो तैयार नहीं हैं। दिल्ली में बैठे लोग गरीब की थाली में खाना नहीं, एसिड छिड़क रहे हैं, नमक छिड़क रहे हैं। कोई कहता है दो रुपए में भर पेट खाना मिलता है तो कोई पांच रुपए में।
मोदी ने कहा कि पीएम जी, देश के आखिरी छोर पर बैठे आदमी को योजनाओं को लाभ कैसे मिले? इस पर विचार करने की जरूरत है। कांग्रेस और उसकी सहयोगी सरकारें इंदिरा गांधी की योजनाओं को लागू करने में नाकाम रही हैं, जबकि भाजपा और सहयोगी दलों की सरकारें उनसे बेहतर हैं।
मोदी ने कहा कि वह राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति जी की पीडा़ समझते हैं। देश के शासक इस पीडा़ का जवाब दे पाएंगे या नहीं, वह नहीं जानते। राष्ट्रपति की चिंता यह है कि शासक दल ससंद को चलने नहीं दे रहा।
‘कांग्रेस की दुनिया तो मोदी तक’
उन्होंने कहा कि पीएम जी आज देश की मांग है कि हम स्पर्धा करें। जब तिरंगा लहरा रहा है तो आपकी एक ब्रिगेड कंप्युटर पर मोदी को गाली देने में लगी है। अरे, आज तो जन गण मन का गान कर लो। कांग्रेस की दुनिया तो मोदी तक सिमट गई है।
पीएम जी, काम में कमियां हो सकती हैं इरादों में नहीं होनी चाहिए। अटल-आडवाणी के राज में लोगों में विश्वास पैदा हो गया था कि देश बुलंदियों को छू लेगा। लेकिन 2004 के बाद से देश गड्ढे में चला गया है।