दिल्ली में निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. अलग-अलग स्कूलों में फीस बढ़ोतरी के मामले सामने आने के बाद सरकार पर कार्रवाई का दबाव बढ़ रहा है, तो कई जगहों से फीस बढ़ोतरी के बाद गुस्साए अभिभावकों के विरोध प्रदर्शन की खबरें भी सामने आयी हैं, इसके बाद विपक्ष ने फीस बढ़ोतरी के मामले पर केजरीवाल सरकार को घेरना शुरू कर दिया है.
दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने आरोप लगाया है कि एक तरफ तो सरकार निजी स्कूलों पर लगाम लगाने की बात करती है, प्राइवेट स्कूलों की मुनाफाखोरी को खत्म करने का दावा करती है, लेकिन पिछले रास्ते से उन्हें फीस बढ़ाने की मंजूरी भी दे देती है. दिल्ली सरकार निजी स्कूलों के मामले में दोहरा रवैया अपना रही है और फीस बढ़ोतरी का ताजा मामला सरकार के इसी दोहरेपने का नतीजा है.
मनोज तिवारी ने स्कूली बच्चों के मां-बाप को स्कूलों की तरफ से मिल रहे फीस बढ़ोतरी नोटिसों का हवाला देते हुए कहा कि हर बच्चे के अभिभावकों को 10 से 40 हज़ार रुपए तक की अतिरिक्त फीस वसूली के नोटिस मिले हैं, यही नहीं स्कूल इस बढ़ी हुई फीस को वसूलने के लिए अभिभावकों पर दबाव बना रहे हैं.
बीजेपी का आरोप है कि स्कूलों की ये मुहिम सरकार की उस मंजूरी का नतीजा है, जिसमें सरकार ने स्कूलों को सातवें वेतनमान आयोग की सिफारिशों के मुताबिक फीस बढ़ाने की छूट दी है. विपक्ष आरोप लगा रहा है कि सरकार ने पिछले दरवाज़े से स्कूलों को बच्चों के मां-बाप से पिछली तारीख से बढ़ी हुई फीस का एरियर वसूलने की छूट भी दे दी है, इसीलिए स्कूलों की तरफ से नोटिस दिए जा रहे हैं.
तिवारी ने कहा कि एक तरफ तो मनीष सिसोदिया निजी स्कूलों की मनमानी रोकने का दावा करके अपनी पीठ थपथपाते हैं, लेकिन अब पिछली तारीखों से फीस वसूली जा रही है, तो सरकार ऐसा रवैया क्यों अपना रही है और लोगों को गुमराह किया जा रहा है, क्योंकि बिना सरकार की सहमति के फीस बढ़ाने का फैसला निजी स्कूल नहीं ले सकते.