सोशल मीडिया में नरेंद्र मोदी के आक्रामक प्रचार के बीच कांग्रेस पार्टी भी सोशल मीडिया पर अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है। अहमद पटेल, जनार्दन द्विवेदी और जयराम रमेश जैसे पार्टी के सीनियर नेता सोशल मीडिया की स्ट्रैटजी को बनाने में जुटे हैं।

क्या नेताओं की तक़दीर इंटरनेट से तय होने वाली है? क्या फेसबुक पर बहस में शामिल होकर वोटर…

राहुल करेंगे साइबर ‘रण’, मोदी से होगी ट्विटर पर ‘टक्कर’

सोशल मीडिया में नरेंद्र मोदी के आक्रामक प्रचार के बीच कांग्रेस पार्टी भी सोशल मीडिया पर अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है। अहमद पटेल, जनार्दन द्विवेदी और जयराम रमेश जैसे पार्टी के सीनियर नेता सोशल मीडिया की स्ट्रैटजी को बनाने में जुटे हैं।

क्या नेताओं की तक़दीर इंटरनेट से तय होने वाली है? क्या फेसबुक पर बहस में शामिल होकर वोटर अपना मूड बनाएगा? क्या सोशल मीडिया सियासत में संवाद का सशक्त माध्यम बन रहा है?

आज के परिवेश में भले ही इन सवालों का जवाब हां और ना के बीच लटकता दिख रहा हो। लेकिन कम से कम साल 2014 के बाद इसकी व्यवहारिकता और प्रासंगिकता को नकारा नहीं जा सकेगा।

शायद इस बात को वो पार्टी भी समझने लगी है जिसने देश को आईटी युग तो दिया लेकिन ख़ुद आईटी में भरोसा नहीं कर सकी जो राहुल गांधी अब तक सोशल मीडिया में अवतरित नहीं हुए हैं उन्हें अब यहां का ऑनलाइन युवा ऑफलाइन वोटबैंक की तरह नज़र आता है। इसीलिए अजय माकन की अगुवाई में संचार समिति बनाई गई है जिस पर ज़िम्मेदारी है कि वो कांग्रेस को इस ऑनलाइन दुनिया

में प्रचारित करें। अब राहुल को भले ही सोशल मीडिया में वोटर दिखता हो लेकिन कांग्रेस इसकी ताक़त को जानते हुए भी वोटबैंक नहीं दिखता। कांग्रेस शायद इसे ताक़त के तौर पर देख भी ना पाती अगर अन्ना का आंदोलन नहीं होता और फेसबुक के ज़रिए ही एक नई पार्टी आप का जन्म न होता। इस ताक़त को सबसे ज़्यादा बल तब मिला

जब फेसबुक जन-जागरण का काम करते हुए एक ऐसे आंदोलन को सामने ले आया, जिसने सरकार तक को सोचने पर मजबूर कर दिया। हालांकि सरकार को पल भर के लिए ऐसा लगा कि जो नियंत्रण में नहीं है उस सोशल मीडिया को प्रतिबंधित कर दिया जाए लेकिन शुक्र है कि नियमन से बात बन गई और अब इसका इस्तेमाल सियासत के लिए किया जा रहा है।

वेब की दुनिया पर कांग्रेस की इस नई स्ट्रैटजी के पीछे विपक्षी पार्टी बीजेपी भी है जो शुरू से ही साइबर की दुनिया में अपना परचम लहरा रही है और इसके सबसे माहिर खिलाड़ी कोई और नहीं बीजेपी के चहते नरेंद्र मोदी रहे हैं। मोदी का गूगल हैंग आउट ट्विटर से संदेश देना, फेसबुक से लोगों की रायशुमारी करना, गुजरात चुनावों में मोदी का 3डी अवतार और इन सबके के बाद गुजरात मेंशानदार जीत।

इन सब के अलावा मोदी और वसुंधरा के नाम के एंड्रॉयड एप्स। इन सभी फैक्टर्स ने कांग्रेस को ऑनलाइन वर्ल्ड को गंभीरता से लेने पर मजबूर किया लेकिन भारतीय सियासत में ये भी सच है कि कांग्रेस अगर कुछ भी करती है तो काफी बड़ा करती है।

ऐसे में साइबर पर 2014 के चुनावी संग्राम में कांग्रेस बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती बनेगी। इसके अलावा सोशल साइट्स पर छोटी पार्टियां भी हैं और वो भी इस ऑनलाइन चुनावी महाभारत में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेंगी। तो आप भी इंटरनेट पर नज़रें जमाए रखिए क्योंकि 2014 के चुनावी समर में पार्टियों की रणनीति को समझने और परखने का बढ़िया मौका मिलेगा।

By parshv