जम्मू, । आतंकी हमले में घायल हुए हीरानगर पुलिस स्टेशन में तैनात पुलिसकर्मियों का कहना है कि हमला ऐसे हुआ कि उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला। अस्पताल में उपचाराधीन कांस्टेबल रतन चंद ने बताया कि जिस समय थाने पर हमला हुआ, उस समय वह दूसरी मंजिल में बने बैरक में अपने साथी प्रदीप सिंह के साथ मौजूद था। आतंकी थाने में नीचे संतरी ड्यूटी पर तैनात शिव कुमार व ड्यूटी ऑफिसर एएसआइ रतन सिंह को गोलियां मार सीधे ऊपरी बैरक में पहुंच गए। आतंकियों को बैरक में घुसता देख रतन चंद व प्रदीप सिंह ने बैरक से नीचे छलांग लगा दी, लेकिन आतंकियों ने इसके बाद भी उन पर गोलियां दागना जारी रखा।

रतन ने बताया कि आतंकियों की एक गोली प्रदीप सिंह के सिर में जा लगी और दूसरी मंजिल से जमीन पर गिरने से पहले ही प्रदीप सिंह दम तोड़ चुका था, जबकि एक गोली उनके दाएं हाथ में लग गई। नीचे गिरने के कारण उनकी एक टांग टूट गई। बतौर रतन ऊपर से आतंकी गोलियां चला रहे थे और वह किसी तरह खुद को घसीटता हुआ एक सुरक्षित स्थान तक पहुंचा। इसी हमले में घायल एएसआइ गंगू राम ने बताया कि हमले के समय वह थाने के साथ ही बने क्वार्टर में छत पर मौजूद थे। आतंकी एकाएक उनके सामने छत पर पहुंच गए और उन्होंने उन पर गोलियां बरसा दी। गोली उनकी टांग में लगी और वह नीचे गिर गया। आतंकी उन्हें मृत समझ कर आगे निकल गए और उन्होंने इसके बाद भी थाने में गोलियां बरसाना जारी रखा। सुबह का समय होने के कारण थाने में मौजूद कर्मियों के ड्यूटी बदलने का समय था और उसी का फायदा उठाते हुए आतंकी हमले को अंजाम देकर मौके से फरार होने में कामयाब हो गए।

By parshv