भारत सहित अन्‍य देशों के दूतावासों की जासूसी करने को अमेरिका अपनी गलती नहीं मान रहा है। इसलिए अमेरिका ने इस मुद्दे पर माफी मांगने से भी साफ इनकार कर दिया है। अमेरिका के इस रवैये से कई देश खुश नहीं हैं।अमेरिका का कहना है कि वो उसी तरह विदेशी खुफिया जानकारी जुटाता है, जैसे दूसरे अन्य देश करते हैं, उन्‍होंने कोई ऐसा काम नहीं किया है जो दूसरे देश नहीं… अमेरिका नहीं मानता दूतावासों की जासूसी कराने को गलत!

भारत सहित अन्‍य देशों के दूतावासों की जासूसी करने को अमेरिका अपनी गलती नहीं मान रहा है। इसलिए अमेरिका ने इस मुद्दे पर माफी मांगने से भी साफ इनकार कर दिया है। अमेरिका के इस रवैये से कई देश खुश नहीं हैं।अमेरिका का कहना है कि वो उसी तरह विदेशी खुफिया जानकारी जुटाता है, जैसे दूसरे अन्य देश करते हैं, उन्‍होंने कोई ऐसा काम नहीं किया है जो दूसरे देश नहीं करते हैं। अमेरिका के इस बयान से यह बात सामने आई है कि सभी देश एक-दूसरे की जासूसी करते हैं और सबका तरीका भी लगभग एक जैसा होता है। विदेश विभाग के प्रवक्ता पैट्रिक वेंट्रेल ने कहा कि हम कथित खुफिया गतिविधियों के बारे में सार्वजनिक तौर पर टिप्पणी नहीं करेंगे। जहां तक नीति की बात है, हमने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका उसी तरह खुफिया जानकारी एकत्र करता है जिस तरह सभी देश करते हैं।     इस बीच वाशिंगटन में भारतीय दूतावास ने पीटीआई द्वारा भेजे ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया, जिसमें उसने पूछा था कि क्या उसे अमेरिका द्वारा दूतावास की जासूसी करने की जानकारी है और क्या राजदूतों ने यह मामला अमेरिका के सामने उठाया है? वेंट्रेल ने भी इस सवाल का कोई सीधा जवाब नहीं दिया कि क्या उसे अन्य देशों से कई शिकायत मिली है। उन्होंने कहा कि मैं राजनयिक स्तर पर हुई वार्ता की चर्चा नहीं करना चाहता। हम इस बारे में संबंधित देशों से प्रत्यक्ष और निजी तौर पर बात करेंगे।जी-20 ग्रुप की बैठक में भी हुई थी जासूसी…ब्रिटेन ने साल 2009 में हुई जी-20 ग्रुप की दो मीटिंग में शामिल नेताओं और अधिकारियों की जासूसी कराई थी, इसके पीछे वजह यह थी कि इन महत्वपूर्ण वित्तीय वार्ताओं में अपना पक्ष मजबूत कर सके। इस सनसनीखेज खबर का खुलासा ब्रिटेन के न्‍यूजपेपर द गार्जियन ने किया।

By parshv