वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने जिंदगी में टेक्नोलॉजी के बढ़ते दखल पर चिंता जताई है। पुर्तगाल के लिस्बन में हो रहे वेब समिट में हॉकिंग ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कहा कि- ‘आज हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बहुत उत्साहित हैं, लेकिन आने वाली पीढ़ी इसे इंसानी सभ्यता के इतिहास की सबसे खराब घटना के तौर पर याद करेगी।’ हॉकिंग ने इस सम्मेलन में तकनीक के नुकसान और जलवायु परिवर्तन पर बात की। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के साथ-साथ हमें इसके संभावित खतरों के बारे में भी सीखना चाहिए। पिछले महीने वैज्ञानिक इयान मस्क भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोट टेक्नोलॉजी को इंसानों के लिए बड़ा खतरा बताते हुए इस पर बैन तक की मांग कर चुके हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को इस दौर की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है। मैं कहता हूं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इंसानी सभ्यता के इतिहास की सबसे खराब घटना के तौर पर याद किया जाएगा। आने वाली पीढ़ी के सामने इसके इस्तेमाल को लेकर बड़ी चुनौती है। इससे बचने का एक ही तरीका है कि हम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सीखने के साथ-साथ इससे मानवता को हो सकने वाले संभावित खतरों के बारे में भी सीखें। एआई में पूरी धरती को तबाह करने की ताकत है, तो साथ ही बड़ी बीमारियों को सही करने की भी क्षमता है। एआई भविष्य में इंसानों को ही रिप्लेस कर सकती है।

आबादी और प्रदूषण ऐसे ही बढ़ता रहा तो धरती 600 साल में आग का गोला बन जाएगी
दूसरी बड़ी समस्या जलवायु परिवर्तन है। आबादी और प्रदूषण जिस तरह से बढ़ रहा है, 600 साल में धरती आग का गोला बन जाएगी। साफ कहूं तो हमें अब उन जगहों पर जाना होगा, जो आज तक अछूती रही हों। हमारे सोलर सिस्टम से जो भी तारे पास में हैं, वहां पहुंचने के बारे में वैज्ञानिकों को सोचना चाहिए। एल्फा सेंचुरी इसका उदाहरण है, जो धरती से 4.37 प्रकाश वर्ष की दूरी पर ही है। अभी हमारे पास जो एयरक्राफ्ट हैं, उनसे ये दूरी तय करने में काफी वक्त लग जाएगा। जो स्पेस एजेंसी सक्षम हैं, उन्हें नैनोक्राफ्ट जैसा कुछ तैयार करना होगा, जो इस दूरी को 15-20 साल में तय कर सकें। मैं आर्थिक रूप से सक्षम लोगों से भी अपील करता हूं कि वो इस दिशा में निवेश कर स्पेस एजेंसियों की मदद करें।