पाकिस्तान के हालात पिछले कुछ समय से ज्यादा ही खराब चल रहे हैं। यहां पिछले साल जनवरी से मजहबी समुदायों को निशाना बना कर की गई हिंसा के 203 मामलों में लगभग 717 लोगों की मौत हुई और 1108 लोग घायल हो गए। चौंकाने वाली यह जानकारी कांग्रेस द्वारा गठित एक स्वतंत्र आयोग की रिपोर्ट पाकिस्तान मजहबी हिंसा परियोजना ने दी है।बता दें कि हाल ही में पाकिस्तान में… 
पाकिस्तान के हालात पिछले कुछ समय से ज्यादा ही खराब चल रहे हैं। यहां पिछले साल जनवरी से मजहबी समुदायों को निशाना बना कर की गई हिंसा के 203 मामलों में लगभग 717 लोगों की मौत हुई और 1108 लोग घायल हो गए। चौंकाने वाली यह जानकारी कांग्रेस द्वारा गठित एक स्वतंत्र आयोग की रिपोर्ट पाकिस्तान मजहबी हिंसा परियोजना ने दी है।बता दें कि हाल ही में पाकिस्तान में नवाज शरीफ ने सत्ता संभाली है, लेकिन इसके बावजूद वहां मजहबी हिंसा रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। कांग्रेस द्वारा गठित एक स्वतंत्र आयोग पाकिस्तान मजहबी हिंसा परियोजना (पाकिस्तान रिलीजियस वायोलेन्स प्रोजेक्ट) की जांच में पाक की एक स्याह सूरत सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय मजहबी स्वतंत्रता के लिए अमेरिकी आयोग (यूएस कमीशन फॉर इंटरनेश्नल रिलीजियस फ्रीड़ा-यूएससीआईआरएफ) द्वारा कल जारी की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मरने वालों में दो हिंदू और एक सिख शामिल हैं। आयोग पिछले 18 माह से पाकिस्तान में मजहबी समुदायों के खिलाफ हो रहे कथित हमलों पर नजर रखे हुए था। रिपोर्ट में कहा गया है कि मरने वालों में बड़ी संख्या शिया समुदाय के लोगों की है। रिपोर्ट में कहा गया है गुटीय हिंसा के 203 मामलों में 1,800 से अधिक लोग हताहत हुए जिनमें से 700 से अधिक लोगों की मौत हो गई।यूएससीआईआरएफ की इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है उग्रवादियों और आतंकवादी संगठनों की हिंसा से शिया समुदाय सर्वाधिक प्रभावित हुआ। कुछ जानलेवा हमले तो पवित्र महीनों में और तीर्थयात्राओं के दौरान हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आत्मघाती हमलों और लक्ष्य कर की जाने वाली गोलीबारी का सर्वाधिक खतरा शियाओं पर है। ईसाइयों, अहमदी और हिंदुओं के लिए धार्मिक स्वतंत्रता का माहौल बेहतर नहीं है। इन समुदायों के लोगों के खिलाफ हिंसा की कई घटनाएं हुई हैं।यूएससीआईआरएफ ने कहा है कि यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सरकार के लिए चिंताजनक और चुनौतीपूर्ण तस्वीर पेश करती है।