तिब्बत में कई जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण कर रहे चीन ने ब्रह्मपुत्र के बजाए अपने प्रांतों के करीब स्थित नदियों पर बांध बनाने की योजना बनाई है.
चीनी के सरकारी मीडिया ने अपने लेख में इसकी जानकारी दी.उल्लेखनीय है कि ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध को लेकर भारत कई बार चीन के सामने ऐतराज जता चुका है.पिछले महीने चीन ने उन मीडिया रपट को खारिज करते हुए गलत करार दिया था, जिसमें कहा गया था कि चीन ब्रह्मपुत्र नदी से पानी को मोड़ने के लिए तिब्बत में अरुणाचल प्रदेश के समीप 1000 किलोमीटर लंबी सुरंग बना रहा है.
चीन द्वारा ब्रह्मपुत्र नदियों पर बनाए जा रहे विभिन्न बांधों को लेकर भारत ने पड़ोसी देश (चीन) के सामने अपनी चिंताएं उठाई थी. ब्रह्मपुत्र को चीन में यरलुंग त्संगपो के नाम से जाना जाता है. जिनशा, लान्कांग और नुजूयांग नदियां विशाल जल विद्युत क्षमता के साथ तिब्बत में खासे लोकप्रिय जलमार्ग हैं.
साथ ही वह भारत से होकर नहीं गुजरती हैं. लेख में कहा गया है कि इसका यह मतलब नहीं है कि चीन से भारत में बहने वाली नदियों-जैसे यरलुंग जैगंबो नदी (ब्रह्मपुत्र) पर बने स्टेशन को तिब्बत में बिजली पहुंचाने की योजना से पृथक किया जाएगा, लेकिन वे इसके लिए पहली पसंद नहीं हो सकते.
पहली बड़ी जल विद्युत परियोजना के रूप में ब्रह्मपुत्र पर जांगमू बांध समेत तिब्बत में सीमावर्ती नदी पर बनी चीन की कुछ और योजनाओं पर भारत में चिंता जताई थी.