विदेशी जजों की संरा की मांग ठुकराने की हिम्मत थी मुझमें : सिरीसेन

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श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरीसेन ने गुरुवार को कहा कि लिट्टे के साथ संघर्ष के दौरान हुए कथित युद्ध अपराधों की विदेशी जजों से जांच की संयुक्त राष्ट्र की मांग ठुकराने की हिम्मत उन्हीं में थी।

श्रीलंका फ्रीडम पार्टी (एसएलएफपी) की कार्यकारी समिति की बैठक को संबोधित करते हुए सिरीसेन ने कहा, ‘मैंने अपने दृढ़ संकल्प की ताकत दिखा दी है।’ उनकी इस टिप्पणी को अपनी ही पार्टी एसएलएफपी में हो रही आलोचना का जवाब माना जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘दो हफ्ते पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने कहा था कि जवाबदेही तंत्र में श्रीलंका को अंतरराष्ट्रीय जज रखने ही होंगे। अगले ही दिन, मैंने इसे ठुकराने की हिम्मत दिखाई।’ सिरीसेन की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब जिनेवा में जारी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सत्र में श्रीलंका 2015 के प्रस्ताव को लागू करने के लिए और समय की मांग कर रहा है।

इस प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय मिश्रित प्रणाली बनाने पर जोर दिया गया है। जबकि, तमिल अल्पसंख्यक विदेशी जजों की मांग पर जोर दे रहे हैं। उनका दावा है कि स्थानीय न्यायिक प्रणाली तमिल संघर्ष पीडि़तों को न्याय प्रदान करने में विश्वास से परे है।