अल्पसंख्यक समुदायों की स्कूली छात्राओं को दी जाने वाली छात्रवृत्ति से जुड़ी केंद्र सरकार की योजना के लिए इस बार रिकॉर्ड दो लाख से अधिक लड़कियों ने आवेदन किया है। हालांकि सभी योग्य आवेदकों को छात्रवृत्ति मिलने की संभावना नहीं है क्योंकि लाभार्थियों की सीमा 50,000 है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की अधीनस्थ संस्था मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन (एमएईएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस छात्रवृत्ति योजना के तहत बीते शुक्रवार तक कुल 215,000 से अधिक लड़कियों ने ऑनलाइन आवेदन किया। ऑनलाइन आवेदन की आखिरी तिथि 15 नवंबर है।
पिछले साल 36 हजार को छात्रवृत्ति मिली
एमएईएफ के अधिकारी ने कहा कि जिस तरह से आवेदकों की संख्या बढ़ रही है, उससे लगता है कि 15 नवंबर तक यह संख्या 2.30 लाख तक पहुंच जाएगी। यह संख्या अपने आप में रिकॉर्ड है। आम तौर पर देखा गया है कि आवेदन करने वाली लड़कियों में 70 फीसदी छात्रवृत्ति पाने के योग्य होती हैं। पिछले साल सिर्फ 45,000 लड़कियों के आवेदन मिले थे और इनमें से करीब 36,000 को छात्रवृत्ति दी गई।
नौवीं और 10वीं की लड़कियां भी शामिल
गौरतलब है कि केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की अधीनस्थ संस्था एमएईएफ की ओर से मेधावी स्कूली लड़कियों के लिए बेगम हजरत महल राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना चलाई जाती है। पिछले कई वर्षों से इस योजना के तहत 11वीं और 12वीं कक्षा की लड़कियों को छात्रवृत्ति दी जाती रही है, लेकिन इस बार योजना के दायरे में नौवीं और 10वीं कक्षा की लड़कियों को भी शामिल किया गया है। एमएईएफ के सामने इस बार सबसे बड़ी चुनौती है कि किस तरह सीमित बजट में सभी योग्य आवेदकों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाए। योजना के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित है।
लाभार्थियों की संख्या बढ़ाई जाएगी
अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने भरोसा दिलाया है कि इस बार लाभार्थियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। एमएईएफ के कोषाध्यक्ष मोहम्मद शाकिर हुसैन अंसारी ने कहा कि इस बार आवेदकों की संख्या बहुत अधिक है। इसका मुख्य कारण नौवीं और 10वीं की छात्राओं को भी योजना के दायरे में शामिल करना है। दूसरी वजह जागरूकता बढ़ना है। जागरूकता के कारण ही इस बार 11वीं कक्षा की करीब 84,000 लड़कियों ने छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया है। हमारी कोशिश होगी कि ज्यादा से ज्यादा लड़कियों को छात्रवृत्ति मिले।, लेकिन यह देखना होगा कि मंत्रालय की तरफ से लाभार्थियों की संख्या कितनी बढ़ाई जाती है।