मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष पद निवार्चन के दौरान प्रोटेम स्पीकर दीपक सक्सेना के कांग्रेस उम्मीदवार एन पी प्रजापति को अध्यक्ष निर्वाचित घोषित करने के निर्णय को लेकर मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सदस्यों ने जमकर हंगामा किया और इसके चलते कार्यवाही दो बार स्थगित भी करना पड़ी।
अध्यक्ष पद के निवार्चन को लेकर सक्सेना ने कांग्रेस उम्मीदवार एन पी प्रजापति के समर्थन में आए चार प्रस्तावों का जिक्र किया और नियमों का हवाला देते हुए इनके आधार पर प्रजापति को अध्यक्ष निर्वाचित घोषित कर दिया। इसके बाद बीजेपी के सदस्य आसंदी के समक्ष पहुंच गए और निर्णय के विरोध में जमकर नारेबाजी की। इसके चलते प्रोटेम स्पीकर ने सदन की कार्यवाही दस मिनट के लिए स्थगित कर दी। दस मिनट बाद सदन फिर से समवेत होने पर प्रोटेम स्पीकर अपनी बात कहना चाह रहे थे, तभी भाजपा के सदस्य एकसाथ बोलते हुए आसंदी के समक्ष आ गए। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह निर्णय लोकतांत्रिक व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने जैसा है। बीजेपी सदस्य एक साथ बोलते रहे। वहीं सक्सेना ने सदन की कार्यवाही एक बार फिर स्थगित कर दी।
कांग्रेस के 114, भाजपा के 109, बसपा के दो, सपा का एक और चार निर्दलीय विधायक हैं। चार निर्दलीय और बसपा तथा सपा के तीन विधायक है। सरकार बनाने के समय सातों ने कांग्रेस को समर्थन देने का दावा किया था। इसके पहले आज सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद सबसे पहले बीजेपी विधायक यशोधरा राजे सिंधिया और मालिनी गौड़ ने शपथ ली। सोमवार को 227 विधायकों ने शपथ ग्रहण की थी। प्रोटेम स्पीकर दीपक सक्सेना पहले ही शपथ ले चुके हैं।
नवगठित पंद्रहवीं विधानसभा का पहला सत्र सोमवार से शुरू हुआ है। पहले दिन विधायकों को शपथ दिलाने का कार्य शुरू हुआ। मंगलवार को अध्यक्ष का निवार्चन है और कांग्रेस तथा बीजेपी दोनों ने इसके लिए उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। हालाकि मुख्यमंत्री कमलनाथ का दावा है कि कांग्रेस प्रत्याशी एन पी प्रजापति की विजय होगी।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने बीजेपी पर कुछ विधायकों को प्रलोभन देकर अपनी ओर करने का आरोप भी लगाया है।