ज्योतिर्लिंग महाकाल क्षरण मामले में गुरुवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूजन, आरओ के पानी से अभिषेक, भस्मारती आदि को लेकर कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं। सुनवाई केवल शिवलिंग की सुरक्षा को लेकर हो रही है न कि धार्मिक अनुष्ठान अथवा रीति-रिवाज के संबंध में।
कोर्ट ने मंदिर प्रबंध समिति से वह बोर्ड हटाने को भी कहा जिसमें सुप्रीम कोर्ट के हवाले से दर्शनार्थियों व पुजारियों के लिए निर्देश जारी किए गए थे। इसके तत्काल बाद मंदिर परिसर से बोर्ड भी हटा लिए गए। मामले की अगली सुनवाई 4 दिसंबर को होगी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सारिका गुरु ने याचिका प्रस्तुत की थी। शिवलिंग क्षरण मसले पर कोर्ट ने एक्सपर्ट कमेटी गठित की। बाद में विशेषषज्ञों ने रिपोर्ट तैयार कर कोर्ट में प्रस्तुत की। 27 अक्टूबर को हुई सुनवाई में मंदिर प्रबंध समिति ने जवाब में यह बताया था कि वह क्षरण रोकने के लिए कई उपाय कर रही है। इसमें आरओ के पानी से अभिषषेक, भस्मारती के दौरान ज्योतिर्लिग को सूती कप़़डे से ढंकने, शाम 5 बजे बाद सूखी पूजा करने, गर्भगृह का तापमान नियंत्रित रखने आदि जतन शामिल हैं। इस पर कोर्ट ने समिति के प्रयासों को सराहा था।
27 अक्टूबर को हुई सुनवाई के बाद समिति के उपायों को ही कोर्ट के निर्देश के रूप में प्रचारित कर दिया गया। समिति ने स्वयं इस संबंध में एक सूचना बोर्ड भी मंदिर में कई स्थानों पर लगवाया। बोर्ड में दिए गए निर्देश सुप्रीम कोर्ट के बताए गए। गुरुवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने इन बोर्डो को भी हटाने को कहा। इसके तत्काल बाद मंदिर परिसर ने इन्हें हटाया गया।