प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर अंतर्कलह की खबरों के केंद्र में रही भाजपा ने भोपाल के जंबूरी मैदान से एकजुटता का संदेश भले ही दिया हो, लेकिन अब भी मनमुटाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
आयोजन के स्टार दो ही शख्स थे। नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान।
जहां शिवराज के पोस्टरों, मुखौटों और टीशर्ट से कार्यकर्ता लैस दिखाई दे रहे थे, वहीं नारे नरेंद्र मोदी के लगाए जा रहे थे। भाजपा नेताओं का दावा था कि कम से कम चार लाख कार्यकर्ता इस मौके पर उपस्थित थे।
आडवाणी थे अनमने
वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जब कार्यकर्ता महाकुंभ के मंच पर बुके दिए तो चौहान ने तपाक से आडवाणी के पैर छू लिए।
लेकिन मोदी कुछ देर बुके लेकर खड़े रहे। फिर मोदी झुके और लालकृष्ण आडवाणी के पैर छुए। आडवाणी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज भी कुछ अलग-थलग सी बैठी रहीं।
भाजपा का समूचा केंद्रीय नेतृत्व वहां था। सब एक दूसरे की तारीफ भी कर रहे थे, लेकिन यह समझना मुश्किल नहीं था कि इस कुनबे में सब कुछ ठीक नहीं है।
सब कुछ ठीक नहीं
हवाई अड्डे पर भी लालकृष्ण आडवाणी पहले पहुंच गए थे और प्रतीक्षा कक्ष में बैठे थे। कुछ देर बाद वहां नरेंद्र मोदी आए।
फिर दोनों एक ही हेलिकॉप्टर से सभास्थल जंबूरी मैदान तक पहुंचे। लेकिन बताया गया कि उनके बीच संवाद नाममात्र का ही रहा।
हालांकि मंच पर आडवाणी ने जब भाषण दिया तो नरेंद्र मोदी के कामकाज की तारीफ की। उन्होंने शिवराज सिंह चौहान और रमनसिंह की भी बड़ी तारीफ की।
मंच पर प्रवेश करते समय भी आडवाणी सबसे आगे थे। उनके पीछे पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह और अंत में नरेंद्र मोदी थे। आडवाणी ने नरेंद्र मोदी से पहले भाषण दिया।
आडवाणी ने अपने भाषण के आरंभ में ही कह दिया कि भाजपा आज जहां पहुंची है वह आकर्षक भाषणों के कारण नहीं पहुंची है। वह कड़े परिश्रम और तपस्या के कारण यहां पहुंची है।
निष्कर्ष निकालने वाले निकाल रहे थे कि यह मोदी पर निशाना है, लेकिन भाजपा नेताओं का कहना था कि यह नसीहत है।
आडवाणी ने यह भी कहा कि भाजपा को अपनी उपलब्धियों को लेकर चुनाव मैदान में जाना चाहिए। जाहिर था कि आडवाणी विकास आधारित मुद्दों पर जोर देने के पक्ष में हैं।
मोदी को बधाई किसने दी
भाषण देने के बाद मोदी जब मंच की ओर लौटे तो उन्हें राजनाथ सिंह और डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने गर्मजोशी से बधाई दी। आडवाणी तब भी खामोश बैठे रहे।
शिवराज सिंह चौहान ने भी मोदी को उनके भाषण के लिए बधाई दी। सुषमा स्वराज के बारे में पहले तो यही खबरें थीं कि वह सभा के बीच से जाने वाली हैं, लेकिन वह सभा के अंत तक बैठी रहीं।
उमा की गंगा
उमा भारती और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का मनमुटाव किसी से छुपा नहीं है।
जब शिवराज और प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने उमा भारती का मंच पर स्वागत किया और उन्हें माला पहनाई तो कार्यकर्ताओं ने जबर्दस्त प्रतिक्रिया दी।
उमा भारती ने अपने भाषण में कम से कम दो बार इस बात का जिक्र किया कि वह साढ़े पांच साल भाजपा से अलग रहीं और क्यों रहीं।
आखिर उन्होंने कहा कि जैसे गंगा की धारा फिर गंगा में मिल जाती है, उसी तरह उनकी जनशक्ति पार्टी को पिछले चुनाव में जो 5.5 फीसदी वोट मिले थे, अब वो भाजपा को मिल जाएं।
उल्लेखनीय है कि उमा भारती ने पिछले चुनाव में करीब 12 लाख मत हासिल किए थे और उनकी वजह से भाजपा को करीब 18-20 सीटों का नुकसान हुआ था।
प्रदेश की 75 सीटों पर जनशक्ति पार्टी के उम्मीदवारों ने 5000-5000 वोटों से ज्यादा मत हासिल किए थे।
शिवराज को विराट रूप दर्शन
उमा भारती ने भाजपा से अलग होने का नया बहाना गढ़ते हुए कहा कि जब वह मुख्यमंत्री थी तब हुगली में झंडा फहराने को लेकर उनके खिलाफ वारंट निकला तो उन्होंने कहा था कि वह राष्ट्र के लिए पद छोड़ने से जरा भी हिचकेंगी नहीं।
उमा भारती ने यह भी दम ठोककर कहा कि वह आज भी हिंदुत्व और राष्ट्रीय हितों पर कोई समझौता नहीं करेंगी।
उमा भारती ने इशारे-इशारे में यह भी कहा कि जैसे कृष्ण ने महाभारत में विराट रूप का दर्शन देकर अर्जुन का भय दूर कर दिया था उसी तरह आज कार्यकर्ताओं के इतने बड़े समूह ने शिवराज सिंह चौहान को विराट रूप का दर्शन करा दिया है।