एक गाँव में बहुत ही आलसी व्यक्ति रहता था। वह इतना आलसी था कि कई सारे दिन बिना नहाये ही निकाल देता था। मगर पेट तो रोज़ाना ही भरना पड़ता था |

वह व्यक्ति इतना आलसी था कि उसने कभी अपने घर में चूल्हा तक नही जलाया था। जब कोई उसको खाने को दे देता था तो वह खा लेता नहीं तो भूखा प्यासा नदी किनारे बैठकर भगवान को कोसता रहता था

कुछ दिनो के बाद एक दिन ऐसा भी आया कि उस आलसी व्यक्ति को किसी ने भी खाने के लिए कुछ नही मिला । जब भूख बहुत बढने लगी तो बेचैन सा हो गया।

तभी वह एक द्रश्य देखता है कि उस नदी में जहां वो बैठा है एक कौआ बड़े ही आराम से तैर रहा था उस व्यक्ति को ये देखकर हैरानी हुई, लेकिन ध्यान से देखने पर पता चला कि कौआ एक मगरमच्छ की पीठ पर बैठा हुआ था।
उसने सोचा मैं जितना भी आलसी हूँ लेकिन यह कौआ तो मुझ से भी ज्यादा आलसी निकला , जो उड़ने से बचने के लिए मगरमच्छ की पीठ पर बैठ कर नदी पार कर रहा है।

धीरे धीरे दोनों नदी किनारे पहुँच गए। नदी किनारे पहुँचते ही कौआ उड़ कर जामुन के पेड़ पर जा पहुंचा। और कुछ हो देर में उड़ कर आया और मगरमच्छ के मुँह में कुछ जामुन डाल दिए। और मगरमच्छ मजे से जामुन खाने लगा। कौआ बार बार उड़ता और जामुन अपनी चोंच में भर मगरमच्छ के मुँह में डाल देता। कुछ देर बाद अपना पेट भरकर मगरमच्छ वापिस नदी में चला गया और कौआ पेड़ पर बैठ जामुन खाने लगा।

यह सब देख वह आलसी व्यक्ति सोच में डूब गया। जिसे मैं आलसी कौआ समझ रहा था वह तो बिलकुल उल्टा निकला। इतनी बार पेड़ से जामुन तोड़ उसने पहले अपने मित्र का पेट भरा और फिर अपना।

एक कौवे ने उसकी सोच बदल दी। उसने ठान लिया कि अब से वह काम करेगा और सिर्फ अपनी मेहनत की रोटी ही खाएगा।