नवरात्र में अपने कुल देवी-देवताओं की पूजा का विशेष प्रावधान माना गया है । वैसे दोनों ही नवरात्र मनाए जाते हैं। फिर भी इस नवरात्र को कुल देवी-देवताओं के पूजन की दृष्टि से विशेष मानते है, क्योंकि यह नवरात्र हिन्दू कैलेण्डर के प्रथम दिन से शुरू होती है। इसलिए इस नवरात्र को ब़डे नवरात्र भी कहा जाता है। नवरात्र के नौ दिनों में माता के पूजन का विशेष महत्व माना गया है।
दूर्गा सप्तशती के अनुसार माता ने ऎसा आशीर्वाद दिया था कि जो भी अष्टमी, नवमी पर मेरी महापूजा करेगा, उसके कुल में हमेशा धनधान्य रहेगा और मैं उसके कुल की स्वयं रक्षा करूंगी। ऎसी मान्यता है कि हर कुल की एक देवी होती हैं और कहा जाता है कि कुल देवी पूरे कुल की रक्षा करती है। नवरात्र के नौ दिनों में अष्टमी और नवमी को माता के पूजन का विशेष महत्व है।
इसलिए कुल देवी का पूजन भी इन दो तिथियों को ही कि। कहते हैं कि चैत्र नवरात्र में कुलदेवी का पूजन इसीलिए किया जाता है ताकि पूरे साल कुल में हर्षोउल्लास और खुशी का माहौल रहे और कुल में जिस भी बच्चे का जन्म हो वह अपने कुल का नाम रोशन करे, इसीलिए हिन्दू समाज की लगभग हर जाति में नवरात्र में अधिकांशत: कुलदेवी का विशेष मन्त्र जप व अनुष्ठान किया जाता है।