संसद का शीतकालीन सत्र मंगलवार को शुरू हो रहा है। इससे पहले सपा और बसपा को छोड़कर लगभग समूचे विपक्ष ने सीबीआई से लेकर आरबीआई तक तमाम संवैधानिक संस्थाओं को संकट में बताते हुये भाजपा को सत्ता से बाहर करने के साझा लक्ष्य को हासिल करने पर एकजुटता जतायी है। तेलुगु देसम पार्टी (तेदेपा) के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू के संयोजन में कांग्रेस सहित 21 विपक्षी दलों के नेताओं की सोमवार को हुयी बैठक में इस बात पर सहमति बनी है कि ‘संकटग्रस्त संविधान और संवैधानिक संस्थाओं को बचाने’ तथा भाजपा को हराने के लिए वे मिलकर लड़ेंगे।
संसद के भीतर और बाहर घेरेंगे मोदी सरकार
बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि राफेल और नोटबंदी सहित अन्य मामलों में भाजपा के भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करने पर बैठक में आम सहमति बनी है। हम इन मुद्दों पर संघर्ष के लिये तैयार हैं। इस भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिये हर संभव उपाय अपनाते हुये विपक्षी दल संसद के भीतर और बाहर मोदी सरकार को घेरेंगे। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को सामने रखते हुये सभी दलों ने भाजपा आरएसएस को एकजुट होकर हराने पर सहमति व्यक्त की है।
उर्जित पटेल के इस्तीफे पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने भगोड़ा कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण को ब्रिटिश अदालत से मंजूरी मिलने को बड़ी कामयाबी मानने से इंकार करते हुये कहा कि देश में प्रतिदिन किसान खुदकुशी कर रहे हैं, बैंकिंग प्रणाली किसान की पहुंच से दूर है। उन्होंने आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल के इस्तीफे के सवाल पर कहा कि सरकार द्वारा उठाये जा रहे कदम देश के लिये खतरा साबित हो रहे हैं। आरबीआई के गवर्नर को इसलिये इस्तीफा देना पड़ा क्योंकि वह एक संस्था के रूप में आरबीआई को बचाने की कोशिश कर रहे थे।
2019 में भाजपा को रोकने के लिए बनाया प्लान
गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा के खिलाफ मोर्चा बनाने के लिए हुई विपक्षी नेताओं की बैठक में बसपा और सपा ने भाग नहीं लिया। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम विधानसभा चुनावों के नतीजों की घोषणा से पहले विपक्षी दलों के नेताओं ने मुलाकात की। इस बैठक में आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह एवं भगवंत मान, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार एवं प्रफुल्ल पटेल, तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी, नेशनल कान्फ्रेंस (नेकां) के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला, माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी और भाकपा के महासचिव एस सुधाकर रेड्डी एवं सचिव डी राजा शामिल हुए थे।