रतलाम। लेबड़-जावरा फोरलेन की जर्जर हालत को लेकर मप्र सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी)ने बड़ी कार्रवाई की है। टोल कंपनी एस्सेल इंफ्रास्ट्रक्चर लि. पर एमपीआरडीसी ने 5 करोड़ रुपए की पेनल्टी लगाई है। खराब सड़क, तय संख्या में बिजली पोल नहीं लगाने और सड़क निर्माण के समय काटे गए पेड़ के बदले पौधारोपण नहीं करने के मामले में यह कार्रवाई की गई है।
एमपीआरडीसी की पेनल्टी का असर भी हुआ, रतलाम से बदनावर के बीच सड़क की मरम्मत शुरू कर दी गई और 42 किलोमीटर के मार्ग के दोनों ओर 50 हजार पौधे रोपने के लिए वन विभाग से अनुबंध भी कर लिया।
रतलाम से बदनावर के बीच गड्ढों से पटी सड़क के बावजूद निरंतर टोल वसूली और अनुबंध की शर्तों की अनदेखी के कारण शहरवासियों में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है। एमपीआरडीसी अधिकारियों तक एक के बाद एक कई शिकायतें पहुंची। मप्र वित्त आयोग अध्यक्ष हिम्मत कोठारी और शहर विधायक चेतन्य काश्यप ने भी लोक िनर्माण मंत्री सरताज सिंह तक यह मामला पहुंचाया। मंत्री ने एमपीआरडीसी को टोल कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके बाद एमपीआरडीसी ने कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की।
73 के बजाए 16 जगहों पर लगाई स्ट्रीट लाइट
लेबड़ से जावरा के बीच टोल कंपनी को अनुबंध की शर्तों के अनुसार 73 स्थानों पर स्ट्रीट लाइट लगाना थी। कंपनी ने महज 16 स्थानों पर स्ट्रीट लाइट लगाई। एमपीआरडीसी ने 57 स्थानों पर स्ट्रीट लाइट के एवरेज बिल का आकलन और उस पर सरचार्ज लगाकर कंपनी पर पेनल्टी लगाई है। यह रकम करीब 2 करोड़ रुपए है।
लेबड़ से जावरा के बीच टोल कंपनी को अनुबंध की शर्तों के अनुसार 73 स्थानों पर स्ट्रीट लाइट लगाना थी। कंपनी ने महज 16 स्थानों पर स्ट्रीट लाइट लगाई। एमपीआरडीसी ने 57 स्थानों पर स्ट्रीट लाइट के एवरेज बिल का आकलन और उस पर सरचार्ज लगाकर कंपनी पर पेनल्टी लगाई है। यह रकम करीब 2 करोड़ रुपए है।
पेनल्टी का नोटिस जारी कर दिया
टोल कंपनी के खिलाफ अलग-अलग मामलों में 5 करोड़ रुपए की पेनल्टी लगाई है। तय अवधि में यह रकम जमा नहीं की तो रोज का सरचार्ज भी वसूलेंगे। नोटिस जारी कर दिया है। आर.के. जैन, डिविजनल मैनेजर एमपीआरडीसी
टोल कंपनी के खिलाफ अलग-अलग मामलों में 5 करोड़ रुपए की पेनल्टी लगाई है। तय अवधि में यह रकम जमा नहीं की तो रोज का सरचार्ज भी वसूलेंगे। नोटिस जारी कर दिया है। आर.के. जैन, डिविजनल मैनेजर एमपीआरडीसी
50 हजार पौधे लगाने के लिए कंपनी ने वन विभाग को दिए 4 करोड़
एमपीआरडीसी से तय अनुबंध के तहत सड़क निर्माण के समय एस्सेल इंफ्रा.लि. ने जितने पेड़ काटे थे उससे 10 गुना ज्यादा पौधे सड़क के किनारे लगाने थे। 2009 में सड़क पर टोल वसूली तो शुरू हो गई लेकिन निर्माण के समय काटे गए 5 हजार से अधिक पेड़ों के बदले पौधे नहीं लगाए गए। एमपीआरडीसी की सख्ती के बाद अब टोल कंपनी ने वन विभाग से 50 हजार पौधे लगाने का अनुबंध किया है। इसके एवज में विभाग को 4 करोड़ रुपए का भुगतान भी कर दिया है। वन विभाग मार्ग के दोनों ओर पौधे रोपने के साथ देखरेख भी करेगा।
एमपीआरडीसी से तय अनुबंध के तहत सड़क निर्माण के समय एस्सेल इंफ्रा.लि. ने जितने पेड़ काटे थे उससे 10 गुना ज्यादा पौधे सड़क के किनारे लगाने थे। 2009 में सड़क पर टोल वसूली तो शुरू हो गई लेकिन निर्माण के समय काटे गए 5 हजार से अधिक पेड़ों के बदले पौधे नहीं लगाए गए। एमपीआरडीसी की सख्ती के बाद अब टोल कंपनी ने वन विभाग से 50 हजार पौधे लगाने का अनुबंध किया है। इसके एवज में विभाग को 4 करोड़ रुपए का भुगतान भी कर दिया है। वन विभाग मार्ग के दोनों ओर पौधे रोपने के साथ देखरेख भी करेगा।
सड़क के लिए लगाई खास तरह की मशीन
एस्सेल इंफ्रा. लि. ने रतलाम से बदनावर के बीच सड़क दुरुस्त करने का काम मुंबई की कंपनी मार्कोलेन को सौंपा है। मार्कोलेन कंपनी ने सातरुंडा से बदनावर के बीच सड़क रिपेयरिंग का काम शुरू कर दिया है। गड्ढों के अलावा सड़क असमतल होने के कारण एक खास तरह की मशीन इस रोड पर लगाई है। प्रदेश में पहली बार किसी स्टेट हाईवे पर इस्तेमाल की जा रही इस मशीन की खासियत यह है कि सड़क को किसी रद्दे की तरह छीलकर एक समान कर देती है।
एस्सेल इंफ्रा. लि. ने रतलाम से बदनावर के बीच सड़क दुरुस्त करने का काम मुंबई की कंपनी मार्कोलेन को सौंपा है। मार्कोलेन कंपनी ने सातरुंडा से बदनावर के बीच सड़क रिपेयरिंग का काम शुरू कर दिया है। गड्ढों के अलावा सड़क असमतल होने के कारण एक खास तरह की मशीन इस रोड पर लगाई है। प्रदेश में पहली बार किसी स्टेट हाईवे पर इस्तेमाल की जा रही इस मशीन की खासियत यह है कि सड़क को किसी रद्दे की तरह छीलकर एक समान कर देती है।
कंपनी बोली- हमने जो पौधे लगाए थे, वे पनप नहीं पाए
एमपीआरडीसी की कार्रवाई की जानकारी फिलहाल हम तक नहीं पहुंची है, नोटिस कंपनी मुख्यालय को भेजा गया है। सड़क के दोनों ओर 50 हजार पौधे लगाने के लिए वन विभाग से अनुबंध किया है। हमारे कर्मचारियों ने जितने पौधे लगाए थे, वे चले नहीं, इसलिए अब वन विभाग से यह काम कराएंगे। रमजान पटेल, प्रोजेक्ट हेड एस्सेल इंफ्रा.लि.
एमपीआरडीसी की कार्रवाई की जानकारी फिलहाल हम तक नहीं पहुंची है, नोटिस कंपनी मुख्यालय को भेजा गया है। सड़क के दोनों ओर 50 हजार पौधे लगाने के लिए वन विभाग से अनुबंध किया है। हमारे कर्मचारियों ने जितने पौधे लगाए थे, वे चले नहीं, इसलिए अब वन विभाग से यह काम कराएंगे। रमजान पटेल, प्रोजेक्ट हेड एस्सेल इंफ्रा.लि.