रतलाम शहर के घनी आबादी और परम्परागत भाजपाई समर्थित क्षेत्र में फोरलेन को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई को पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी ने गैर जिम्मेदाराना और प्रशासनिक निरंकुशता करार दिया है । कोठारी का सवाल है की बिना तोड़फोड़ के भी यदि योजना का वांछित लक्ष्य हाँसिल हो रहा था ? तो प्राथमिकता क्या होना चाहिए ? यदि आपने तय कर लिया की बगैर सुनवाई के प्रशासनिक ताकत का इस्तेमाल करेंगे ।
तो कौन रोक सकता है । उनके अनुसार न्यायालय के फैसले की मनमानी व्याख्या की गई । निजी भूमि के अधिग्रहण के लिए नियम है । उनका कोई पालन नही हुआ । राज्य शासन को जो डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) भेजी गई इसके विपरीत सड़क का निर्माण हो ही नही सकता । अब डीपीआर में यदि नही है तो फिर किसके भले के लिए सड़क की चौड़ाई बढ़ाई जाने की कयावद हो रही है । आगे बनने वाले सागोद रोड ओव्हरब्रिज की डीपीआर में कितनी चौड़ाई रखी गई है । एमओएस छोड़कर निर्माण नही करने की बात पर पूरे रतलाम में बमुश्किल 10 से ज्यादा बंगले ही इस नियम का पालन करते मिलेंगे । एमओएस को आधार बनाकर पूरे शहर के भवनों में तोड़फोड़ होती है तो शायद कोई रहवासी भवन को छोड़ दे , इस आधार पर तोड़फोड़ करने पर पूरा शहर जर्जर हो जाएगा ।