तीर्थ, गुरु, इष्टदेव व माता-पिता में पूर्ण श्रद्घा रखनी चाहिए। अन्यत्र किया पाप तीर्थ में धुल जाता है पर तीर्थ में किया पाप कहीं नहीं धुलता है।
यह बात पं. योगेश्वर शास्त्री ने सनातन धर्मसभा एवं महारुद्र यज्ञ समिति द्वारा आयोजित 64 वें महारुद्र यज्ञ में धर्मसभा में कही। उन्होंने कहा गुरु सेवा करके प्राप्त की हुई शिक्षा जीवन मंगलमय बनाती है। रविवार को महादेव की जलाधारी की रथयात्रा निकाली गई। यह मेला परिसर भ्रमण करते हुए भैरवनाथ मंदिर पहुंची यहां यज्ञाचार्य पं. दुर्गाशंकर ओझा व 21 विद्वान पंडितों के सान्निध्य में यज्ञ के यजमान विमलादेवी जगदीश खंडेलवाल ने भैरव पूजन एवं बलीदान कर्म किया व यज्ञशाला में घृत आहुतियां दी।
महाआरती के बाद रथयात्रा का विसर्जन हुआ। 18 दिसंबर को दोपहर 2 बजे गंगा कलश यात्रा निकलेगी। शंकराचार्य का अभिषेक किया जाएगा। 19 दिसंबर को दोपहर 3 बजे यज्ञ की पूर्णाहुति होगी। महाआरती में अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक कोमल सिंह राठौर, पं. रामचंद्र शर्मा, रमेश व्यास, लालचंद टांक, नवनीत सोनी आदि मौजूद थे। संचालन पुष्पेंद्र जोशी ने किया।