धोलावड़ में पर्याप्त पानी होने के बाद भी इस बार गर्मियों में शहर को कम पानी मिल सकता है। कारण 1.20 करोड़ रुपए की लागत से डेम में बनाए गए इंटकवेल और जेकवेल पिछले साल फेल हो गए थे। साथ ही पानी यहां से दूर हो गया था। इस साल भी डेम का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है। ऐसे में नए जेकवेल से अगले कुछ िदनों में पानी फिर दूर चला जाएगा। ऐसे में नगर निगम ने अभी तक इसे लेकर प्लानिंग नहीं की है। यही स्थिति रही तो इस बार भी नए पंप से पानी नहीं लिया जा सकेगा।
धोलावड़ से भरपूर पानी शहर तक लाने के लिए निगम ने पांच साल पहले यूआईडीएसएसएमटी योजना शुरू की थी। 40 करोड़ रुपए की योजना में मोरवनी में नया फिल्टर प्लांट बनाया था। धोलावड़ से शहर तक नई पाइप लाइन भी बिछाई गई। फिल्टर प्लांट तक भरपूर पानी लाने के लिए नया इंटकवेल बांध के भीतर 60 लाख रुपए की लागत से बनाया। गर्मी के मौसम में इंटकवेल तक पानी भरपूर मात्रा में आए। इसके लिए 60 लाख रुपए की लागत से जेकवेल भी बनाया। बांध का पानी पहले जेकवेल में एकत्र होता है, फिर यहां से इंटकवेल में। इंटकवेल से इसे लिफ्ट करके मोरवनी में बने नए फिल्टर प्लांट तक ले जाया जाता है। अफसरों की लापरवाही के चलते नया इंटकवेल बनाते समय बांध के डेड स्टोरेज के लेवल का ख्याल नहीं रखा गया। नया इंटकवेल पुराने इंटकवेल के ठीक सामने बना दिया व इससे आधा किमी दूर जेकवेल। जेकवेल भी डेड स्टोरेज से ऊंचाई पर बनाया गया। इन्हें बनाते समय तकनीकी पहलूओं का ध्यान नहीं रखा। इसके चलते पिछले साल पानी जेकवेल से भी नीचे चला गया था। ऐसे में नई पाइप लाइन से शहर में पानी आना बंद हो गया। पिछले साल यह स्थिति बनने के बाद अब तक नगर निगम ने कोई नई प्लानिंग नहीं की। ऐसे में अगर इस साल जेकवेल से पानी का लेवल नीचे जाता है तो इस बार भी नगर निगम यहां से पानी नहीं ले सकेगा और शहर में कम पानी आएगा।
386 मीटर तक ही ले सकेंगे पानी
धोलावड़ डेम की भराव क्षमता 395 मीटर है। वर्तमान में यहां का लेवल 389 मीटर के आसपास है। सूत्रों के अनुसार नए जेकवेल से नगर निगम 386 मीटर के लेवल तक पानी ले सकता है। वर्तमान में सिंचाई भी चल रही है और नगर निगम दोनों प्लांट से पानी भी ले रहा है। ऐसे में आने वाले कुछ दिनों में जेकवेल से पानी दूर हो सकता है।
जेकवेल यानी डेम के बीच कुआं
जेकवेल कुआं होता है। यह डेम के बीच बनाया जाता है। ताकि पानी का लेवल डेड स्टोरेज तक पहुंचने पर भी इंटकवेल में सप्लाई में दिक्कत नहीं आए। जेकवेल से पाइप लाइन के जरिए इंटकवेल तक पानी भेजा जाता है। इंटकवेल से टरबाइन के जरिए फिल्टर प्लांट तक।
कर रहे हैं काम
हमने इसे लेकर भोपाल भी बात की है। वहां से भी इंजीनियर आकर इसे देखेंगे। इस साल दिक्कत न आए इसके लिए क्या बेहतर हो सकता है उस पर काम कर रहे हैं।
डॉ. सुनीता यार्दे, महापौर
निर्देश दिए, कुछ नहीं हुआ
नए जेकवेल की स्थिति देखने मैं खुद गया था। वहां समस्या है। इसे लेकर मैंने लगातार अफसरों को निर्देश दिए लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। अफसरों व महापौर को इस मामले को प्राथमिकता से देखना चाहिए। अशोक पोरवाल, नगर निगम अध्यक्ष