मोहर्रम की दसवीं तारीख योमे आशुरा पर बुधवार को मुस्लिम समाज ने दिनभर रोजे रखे। रात को ताजियों का कारवां निकला। यह शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरा। ताजियों के आगे अखाड़ों पर करतब दिखाया और पूरी रात या हुसैन, या हुसैन गूंजा।

मंगलवार रात ताजियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में गश्त की और नमाज के पूर्व वापस अपने-अपने क्षेत्रों में पहुंच गए। बुधवार रात ताजिये अपने-अपने क्षेत्रों से निकले। ये डालू मोदी बाजार पर एकत्रित हुए। यहां से ताजियों का कारवां शुरू हुआ जो शहर के प्रमुख मार्गो से गुजरा। जगह-जगह सबील लगी। इसमें शरबत, खीर, आईसक्रीम, हलवा बांटा गया। हाट रोड, मोचीपुरा, शेरानीपुरा आदि स्थानों पर पूरी रात चहल-पहल रही।

यहां से निकले प्रमुख ताजिये-मोचीपुरा, शेरानीपुरा, काजीपुरा, हाट की चौकी, सैलाना यार्ड, रंगरेज रोड।

ताजिया हज़रत हुसैन के मजार मुबारक की प्रतिकृति-दारुल क़ज़ा व इफ्ता रतलाम के सदर व चीफ काजी सैयद आसिफ अली ने बताया ताजिया इराक स्थित करबला नामक शहर में हज़रत हुसैन के मजार मुबारक की प्रतिकृति होती है। ताजियों का निर्माण हिंदुस्तान, पाकिस्तान व बांग्लादेश में होता है। हिंदुस्तान में बादशाह तैमूर लंग हुआ था वह प्रतिवर्ष मोहर्रम महीने में हज़रत हुसैन के मजार की जियारत करने हिंदुस्तान से इराक स्थित करबला जाया करता था। एक वर्ष अस्वस्थता के कारण जब वह करबला जाने में असमर्थ था तब उसकी प्रबल इच्छा को देख उसके मंत्रियों ने हिंदुस्तान में ही हज़रत हुसैन के मजार की प्रतिकृति बनवाई।

कैमरों की निगरानी में निकले ताजिये

मोहर्रम पर निकलने वाले ताजियों के जुलूस की सुरक्षा के लिए पुलिस ने जुलूस के रास्ते में 35 कैमरे लगवाए। इनमें से 15 कैमरे इंटरनेट के जरिये दो बत्ती स्थित पुलिस कंट्रोलरूम से जुड़े थे। शेष 20 कैमरों में लगातार रिकॉर्डिंग हुई। एएसपी डॉ. प्रशांत चौबे ने बताया सुरक्षा के लिए चार डीएसपी, 11 टीआई के अलावा एसआई, एएसआई सहित 480 का बल तैनात था। व्यवस्था के लिए 24वीं बटालियन, आईजी रिजर्व और डीजीपी रिजर्व बल के 60 जवान बाहर से आए थे। 16 मोबाइल वैन लगातार भ्रमण करती रही। 60 फिक्स पाइंट बनाए थे जहां लगातार चैकिंग की गई।

By parshv