माणकचौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर में 11 अक्टूबर से शृंगार सामग्री आना शुरू हो जाएगी। रतलाम सहित अन्य शहरों के लोग मां महालक्ष्मी की शृंगार सामग्री यानी नोटों की गड्डियों के साथ हीरे, जेवरात आदि रखते हैं। इसके बदले उन्हें टोकन दिया जाएगा।
धन, वैभव व ऐश्वर्य की देवी मां महालक्ष्मी के दरबार में दीपोत्सव को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिर में पांच दिवसीय दीपोत्सव पर्व धनतेरस, रूपचौदस, दीपावली, पड़वा और भाईदूज तक मनाया जाएगा। इस दौरान मंदिर में प्रवेश द्वार से लेकर गर्भगृह तक नोटों की लड़ियों, हीरे, सोने के आभूषण, चांदी के आभूषण आदि से शृंगार किया जाता है। मान्यता है कि मंदिर में धन-दौलत रखने से सालभर बरकत बनी रहती है। मंदिर में शहर ही नहीं वरन दूसरे शहरों से भी लोग धन-संपदा लेकर आते हैं। मंदिर के संजय पुजारी ने बताया माता की शृंगार सामग्री 11 अक्टूबर से ली जाएगी। भक्त मंदिर में दोपहर 2 से शाम 5 बजे व रात 9 से 11 बजे तक धन जमा करवा सकते हैं।
कुबेर पोटली बनना शुरू
मंदिर में कुबेर पोटली बनाने का काम शुरू हो चुका है। धनतेरस पर माता के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को यह कुबेर पोटली दी जाएगी। कुबेर पोटली को घर की तिजोरी में रखने से वर्षभर बरकत बनी रहती है। इससे धन-धान्य और वैभव मिलता है।