रतलाम। शहर के माणकचौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर रविवार शाम को जगमगा उठा। पांच दिवसीय दीपोत्सव के मद्देनजर मंदिर की आकर्षक साज-सज्जा की गई है। मां के चरणों में सोना-चांदी और नोट चढ़ाए गए हैं। मंदिर में इतनी ‘माया’ बरस रही थी कि लोक हैरत में थे।
परंपरा के अनुसार, धन-धान्य में वृद्धि के लिए व्यापारी और शहरवासी मां के चरणों में जेवर और राशि चढ़ाते हैं। संजय पुजारी ने बताया द्वार पूजन कर धनतेरस से दीपावली महापर्व की शुरुआत होगी।
महालक्ष्मी मंदिर को नोटों और बेशकीमती जेवरों से सजाने का काम दो दिन पहले ही शुरू हो गया था। तब मंदिर के बाहर रास्ते पर धन की देवी के लिए 500 रुपए तक के नोटों से खास वंदनवार बनाया गया था। ये बंदरवार दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा तक बंधे रहेंगे।
तब 80 करोड़ थे
पिछले साल इस मंदिर को 80 करोड़ रुपए के नोटों और सोने से सजाया गया था। खास बात ये है कि तीन दिन बाद यानि दिवाली के दिन ये सभी आभूषण और नगद भक्तों को वापस लौटा दिए जाएंगे।
पुरानी है परंपरा
दरअसल, रतलाम के महालक्ष्मी मंदिर में सालों से गहने और राशि चढ़ाने की परंपरा रही है। इस भेंट को बकायदा रजिस्टर में नाम के साथ नोट भी किया जाता है। जिसके बाद दिवाली के दिन रिकॉर्ड के ही आधार पर भक्तों को सबकुछ प्रसाद के रूप में लौटा दिया जाता है। लोगों का मानना है कि ऐसा करने से उनके घरों में हमेशा मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।