शाम को सुलह, रात को सफाई

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रतलाम। तीन दिन से शहर में चल रही नगर निगम सफाई कर्मचारियों की हड़ताल बुधवार को समाप्त हो गई। शाम को सुलह हुई व रात में कालिका माता मंदिर से सफाई कर गतिरोध खत्म किया गया। निगमाध्यक्ष अशोक पोरवाल की पहल के बाद महापौर, निगम आयुक्त व नेता प्रतिपक्ष ने मांगों को मान लिया। गुरूवार को प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी राजेंद्रसिंह के नेतृत्व में कर्मचारी नेताओं का दल उज्ौन नगर निगम जाएगा व नियमितीकरण किस तरह हुआ, इसका अध्ययन करेगा। आचार संहिता नहीं लगी तो एक सप्ताह में परिष्ाद की बैठक होगी व 24 दिन की बजाय कर्मचारियों को 30 दिन का वेतन संबंधी प्रस्ताव पारित किया जाएगा। दिनभर की कवायद के बाद बुधवार रात में कर्मचारी नेताओं को हड़ताल में शामिल महिलाओं ने जमकर फटकारा और विरोध दर्ज कराया।शहर में 12 अक्टूबर की सुबह नगर निगम संयुक्त कर्मचारी संघ ने हड़ताल की शुरूआत की थी। पहले दिन निगम के गेट पर धरना दिया गया। इसके पूर्व संघ ने तीन दिन की चेतावनी के साथ ज्ञापन आयुक्त व महापौर को दिया था। कर्मचारियों ने भोजन भी निगम में ही बनाकर खाया। 13 को निगम आयुक्त सोमनाथ झारिया ने कर्मचारी नेताओ से हड़ताल के संबध में फोन पर बात की व मुलाकात का दौर जारी रखा। हालाकि कुछ मांग पर सहमति नही होने की वजह से निर्णय नही हो पाया। आयुक्त के कहने पर प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी ने नेताओ पर नामजद एफआईआर के लिए आवेदन दो बत्ती पुलिस थाने भेजा। रात 2 बजे तक निगम प्रशासन इस पर निर्णय नही ले पाया।

बुधवार को सुबह से फोन पर बातचीत के रास्ते शुरू हुए। अनेक बार कर्मचारी नेताओ से महापौर, आयुक्त ने बात की, लेकिन समाधान नही निकला। दोपहर में निगम के स्वास्थ्य समिति प्रभारी भगतसिंह भदोरिया व प्रभारी अधिकारी राजेन्द्रसिंह पंवार के साथ कर्मचारी नेताओं की बैठक हुई, लेकिन परिणाम नहीं निकला। आखिरकार एक और दौर की बातचीत बाद हड़ताल समाप्त हुई।

शाम 6 बजे पहला निर्णय

शाम करीब 6 बजे पहला निर्णय हुआ कि कर्मचारी महापौर व आयुक्त से चर्चा को राजी हैं। इसके करीब 45 मिनट के बाद आयुक्त व महापौर शहर सीएसपी व दो बत्ती थाना प्रभारी सहित पुलिस की भारी सुरक्षा में निगम पहुंचे। यहां निगम अध्यक्ष के कक्ष में करीब 20 मिनट की चर्चा में निर्णय हो गया कि कर्मचारियों की मांगों को मंजूर किया जाता हैं। आयुक्त ने कहा, पहले दिन से चर्चा कर रहा था, लेकिन कोई सुनने को तैयार नही था।

महिलाओं ने किया विरोध

शाम को बैठक के बाद निगम महापौर, अध्यक्ष, आयुक्त व नेता प्रतिपक्ष ने कर्मचारियों को संबोधित किया। इसमे बताया गया कि मांग मंजूर हो गई हैं। इसके कुछ समय बाद कर्मचारी महिलाएं नेताओं पर नाराज हो गई। महिलाओं का कहना था कि हड़ताल के समय तो महिलाओं को आगे किया जाता है, लेकिन समझौता अकेले कर लिया जाता हैं। ऎसा ही रहा तो अगली बार से आंदोलन में नहीं आएंगी।

आखिरी चर्चा में निकला रास्ता

बुधवार सुबह से नगर निगम में कर्मचारी नेताओ के आंदोलन को देख रहे पाष्ाüद जाकिर रावटीवाला व पाष्ाüद पति नंदकिशोर पंवार ने निगम अध्यक्ष अशोक पोरवाल को फोन किया व निगम बुलवाया।

रावटीवाला ने कहा कि त्योहार चल रहे है। नवरात्र में माता व बहने परेशान हो रही हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके बाद पोरवाल आए व कर्मचारी नेताओं से बात की। पोरवाल ने कहा कि जो मांग है, वह सभी मंजूर है, लेकिन पहले हड़ताल समाप्त हो। जरूरत पडे, वहां मेरे दस्तखत ले लो। गलत हस्ताक्षर पर जेल भी जाना पड़ा तो चला जाउंगा। इसके बाद करीब 30 मिनट तक दोनो पक्ष में बात हुई व निर्णय हुआ कि महापौर व आयुक्त को बुलवाया जाए। इस बीच कुछ अधिकारी नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने चले गए थे, उनको रास्ते से निगम अध्यक्ष ने वापस बुलवाया। अधिकारियों के आने बाद आयुक्त व महापौर आए व हड़ताल समाप्त हो गई।

ये हुए प्रमुख निर्णय

24 दिन बदली वाले कर्मचारियों को 30 दिन का वेतन मिलेगा।

इसके लिए निगम सम्मेलन एक सप्ताह में होगा।

नियमीतिकरण के लिए दल गुरूवार को उज्ौन नगर निगम जाएगा।

कर्मचारियों को स्थायी करने के लिए शासन को नियम शिथिल करने का पत्र भेजा।

पूर्व की हड़ताल, कर्फ्यू व वर्तमान हड़ताल का वेतन नही कटेगा।

सुभाष नगर के आवासों की रजिस्ट्री होगी।