कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आज कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान की उपस्थिति में सेवानिवृत्त हुए शासकीय सेवकों को समारोहपूर्वक विदाई दी गई। कार्यक्रम में 15 सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारियों को कलेक्टर रूचिका चौहान द्वारा जीपीओ पीपीओ की प्रति एवं उनके क्लेम के स्वीकृति आदेश दिये गये तथा शाल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिला कोषालय अधिकारी श्री जी.एल.गुवाटिया, श्री प्रदीप कुमार यावलकर, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास श्री जे.एस.डामोर, कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, श्री के.पी. वर्मा, श्री धीरज कुलश्रैष्ठ आदि उपस्थित थे।
कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान ने कहा कि म.प्र. शासन की एक अच्छी पहल के रूप में इस कार्यक्रम को प्रारंभ किया गया है। जिला प्रशासन की ओर से सेवानिवृत्त होने वाले व्यक्तियों को आगे भी कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। हमारा प्रयास है कि कोई भी पेंशनर अनावश्यक रूप में कार्यालय के चक्कर न लगाएं, उनके सभी क्लेमों का निराकरण सेवानिवृत के दिन ही हो जाए, ऐसे प्रयास करेगें। कलेक्टर ने सेवानिवृत होने वाले शासकीय सेवकां के पेंशन प्रकरण 6 माह पूर्व पेंशन कार्यालय में प्रस्तुत करने तथा सेवानिवृति के दिन ही उनके बीमा, अर्जित अवकाश एवं जीपीएफ आदि के स्वीकृति आदेश प्रदाय करने के जिला अधिकारियों को निर्देश दिए। साथ ही सभी सेवानिवृत्त शासकीय सेवकों को स्वास्थ्य का ध्यान रखने एवं योगा व प्राणयाम करने की सलाह भी दी गई।
कार्यक्रम में माह जून 2018 में सेवानिवृत्त होने वाले पेंशनर श्रीमती कुसुमलता जैन, श्री नाथुलाल कटारा, श्री यंशवंत कुमार जेठानिया, श्री मनकामनेश्वर जोशी, श्रीमती आशा श्रोत्रीय, श्री भानुप्रकाश गरवाल, श्री रतनलाल पाठक, श्रीमती श्यामाबाई कल्याणी, श्री नन्दलाल पारगी, श्री देवीप्रसाद व्यास, श्री राजेन्द्र कुमार जोशी, श्री मांगीलाल शर्मा, श्री राधेश्याम पांचाल, श्री मुमताज अली, श्री शांतिलाल पांचाल को समारोहपूर्वक विदाई दी गई। इस अवसर पर सहायक आयुक्त आदिवासी विकास श्री जे.एस.डामोर, जिला शिक्षा अधिकारी, श्री अमर वरधानी, कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य विभाग, श्री के.पी.वर्मा, जिला पेंशन एवं कोषालय से श्री भेरूलाल मईडा, श्री प्रभुलाल मुनिया, सहित बडृ संख्या में कार्यालय प्रमुख एवं अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे । संचालन श्री जिला कोषालय अधिकारी जी.एल. गुवाटिया ने किया तथा आभार सहायक पेंशन अधिकारी श्री धीरज कुलश्रैष्ठ ने माना।