यह पर्व भाई -बहन के रिश्तों की अटूट डोर का प्रतीक है। भारतीय परम्पराओं का यह एक ऎसा पर्व है, जो केवल भाई बहन के स्नेह के साथ साथ हर सामाजिक संबन्ध को मजबूत करता है। इस लिये यह पर्व भाई-बहन को आपस में जोडने के साथ साथ सांस्कृ्तिक, सामाजिक महत्व भी रखता है।
रक्षा बंधन का महत्व:
रक्षा बंधन का पर्व विशेष रुप से भावनाओं और संवेदनाओं का पर्व है। एक ऎसा बंधन जो दो जनों को स्नेह की धागे से बांध ले। रक्षा बंधन को भाई – बहन तक ही सीमित रखना सही नहीं होगा। बल्कि ऎसा कोई भी बंधन जो किसी को भी बांध सकता है।
रिश्तों का बन्धन:
भाई – बहन के रिश्तों की सीमाओं से आगे बढ़ते हुए यह बंधन आज गुरु का शिष्य को राखी बांधना, एक भाई का दूसरे भाई को, बहनों का आपस में राखी बांधना और दो मित्रों का एक-दूसरे को राखी बांधना, माता-पिता का संतान को राखी बांधना हो सकता है।
रिश्ते को पूरी निष्ठा से निभाने का प्रण:
आज के परिपेक्ष्य में राखी केवल बहन का रिश्ता स्वीकारना नहीं है अपितु राखी का अर्थ है, जो यह श्रद्धा व विश्वास का धागा बांधता है। वह राखी बंधवाने वाले व्यक्ति के दायित्वों को स्वीकार करता है। उस रिश्ते को पूरी निष्ठा से निभाने की कोशिश करता है।
आधुनिक महत्व:
आज समय के साथ इसका महत्व ओर बढ गया है। आज के सीमित परिवारों में कई बार, घर में केवल दो बहने या दो भाई ही होते है। उन्हें कौन राखी बांधेगा , या फिर वे किसे राखी बांधेगी। इस प्रकार कि स्थिति सामान्य रुप से हमारे आसपास देखी जा सकती है।
समय की कमी बनी रिश्तों में खटास:
आधुनिक युग में समय की कमी ने रिश्तों में एक अलग तरह की दूरी बना दी है। जिसमें एक दूसरे के लिये समय नहीं होता, इसके कारण परिवार के सदस्य भी आपस में बातचीत नहीं कर पाते है। संप्रेषण की कमी, मतभेदों को जन्म देती है। और गलतफहमियों को स्थान मिलता है।
मतभेदों से छुटकारा:
अगर इस दिन बहन -बहन, भाई-भाई को राखी बांधता है तो इस प्रकार की समस्याओं से निपटा जा सकता है। यह पर्व सांप्रदायिकता और वर्ग-जाति की दिवार को गिराने में भी मुख्य भूमिका निभा सकता है।